जिले के बाजार चारभाठा धान संग्रहण केंद्र में सामने आए धान शॉर्टेज मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला उजागर होते ही जिला प्रशासन को मजबूरी में कार्रवाई करनी पड़ी। संग्रहण केंद्र प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया, वहीं जिला विपणन अधिकारी (डीएमओ) को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है।
हालांकि प्रशासनिक बयान में धान की कमी को ‘सूखत’ (वजन में प्राकृतिक कमी) बताने का प्रयास किया गया है, लेकिन आंकड़े ही इस दावे को संदेह के घेरे में खड़ा कर रहे हैं। सवाल यह है कि जब 2024-25 में सूखत मात्र 3.5 प्रतिशत रही — जो पिछले पांच वर्षों में सबसे कम बताई जा रही है — तो फिर इतना बड़ा शॉर्टेज कैसे हुआ?
प्रशासन के मुताबिक पिछले वर्षों में
2020-21 में 3.9%
2021-22 में 3.67%
2022-23 और 2023-24 में संग्रहण ही नहीं हुआ
इसके बावजूद नियमित निगरानी, भौतिक सत्यापन और जवाबदेही की स्पष्ट कमी सामने आ रही है। चूहे या कीटों से नुकसान की बात को सिरे से नकारते हुए पूरा ठीकरा ‘सूखत’ पर फोड़ना, जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने एक जांच समिति गठित करने की औपचारिकता तो पूरी कर दी है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या यह जांच वास्तविक दोषियों तक पहुंचेगी या फिर फाइलों में दबकर रह जाएगी।
धान खरीदी जैसे संवेदनशील और किसानों से जुड़े मुद्दे में इस तरह की लापरवाही पूरी व्यवस्था की साख पर सवालिया निशान लगाती है। यदि जांच में दोष सिद्ध होता है तो यह देखना अहम होगा कि कार्रवाई सिर्फ निचले स्तर तक सीमित रहती है या जिम्मेदारी तय करते हुए बड़े अधिकारियों तक भी पहुंचती है।
यह मामला न केवल धान संग्रहण व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है, बल्कि भविष्य में पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही तय करने की सख्त जरूरत को भी रेखांकित करता है।