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तालाब में डूबकर श्रमिक की मौत, गुड़ उद्योग की लापरवाही उजागर बीमा, पंजीयन और श्रम कानूनों पर गंभीर सवाल – श्रम विभाग व पुलिस की भूमिका संदिग्ध

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 जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत नेउरगांव कला और तरेगांव मैदान के बीच बोड़ला मुख्य मार्ग स्थित तालाब में रविवार को एक हृदयविदारक और शर्मनाक हादसा सामने आया। यहाँ नहाने गए एक श्रमिक की डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान माहू बैगा (पिता फगनू) के रूप में हुई है, जो मध्यप्रदेश के मंडला जिले के मवाई विकासखंड अंतर्गत ग्राम हर्राटोला लटरा का निवासी था।
छुट्टी के दिन जान गई, सिस्टम सोता रहा
जानकारी के अनुसार माहू बैगा पिछले एक माह से क्षेत्र के एक गुड़ उद्योग में मजदूरी कर रहा था। रविवार को उद्योग में काम बंद होने के कारण दोपहर लगभग 2 बजे वह तालाब में नहाने गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह नशे की हालत में था और नहाते समय गहरे पानी में चला गया, जिससे उसकी मौके पर ही डूबकर मौत हो गई।
परिवार उजड़ा, जिम्मेदार बेपरवाह
मौत की खबर मिलते ही मृतक की पत्नी लक्ष्मी और उनके दो मासूम बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का इकलौता कमाने वाला चला गया, लेकिन गुड़ उद्योग प्रबंधन, श्रम विभाग और प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। उद्योग में काम करने वाले अन्य श्रमिकों में भी भय और शोक का माहौल है।
बीमा, पंजीयन और ‘मुसाफिरी’ पर बड़ा सवाल
सबसे गंभीर सवाल यह है कि—
क्या गुड़ उद्योग में कार्यरत श्रमिकों का श्रमिक बीमा कराया गया था।
क्या बाहरी राज्य से आए इस श्रमिक का पुलिस थाना में मुसाफिरी (अस्थायी निवास) पंजीयन कराया गया था।
क्या श्रम विभाग द्वारा उद्योग का नियमित निरीक्षण किया गया था।
यदि इन सवालों का जवाब “नहीं” है, तो यह सीधे-सीधे श्रम कानूनों का उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही का मामला बनता है।

शव घंटों पानी में, व्यवस्था नाकाम
घटना की सूचना मिलने पर नेउरगांव कला और तरेगांव मैदान के ग्रामीणों सहित राहगीरों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी, लेकिन समाचार लिखे जाने तक शव तालाब से बाहर नहीं निकाला जा सका था। पुलिस का कहना है कि गोताखोरों की मदद से तलाश की जा रही है।
बड़ी सवाल
यह हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी से हुई मौत है।
क्या गरीब और प्रवासी श्रमिकों की जान की कोई कीमत नहीं?
क्या बिना बीमा, बिना पंजीयन उद्योग चलाना प्रशासन की नजर में अपराध नहीं
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मौत को एक और “दुर्घटना” बताकर फाइल बंद करता है, या फिर दोषियों पर कार्रवाई कर श्रमिकों को न्याय दिलाता है।

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