जिले में अवैध प्लाटिंग का खेल अब बेशर्मी की हदें पार कर चुका है। जिला मुख्यालय से सटे ग्राम पंचायत लटुवा में शासकीय धरसा–चरागन भूमि को निजी कॉलोनी में तब्दील कर खुलेआम बेचा जा रहा है और हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।
खसरा नंबर 839, जो स्पष्ट रूप से शासकीय धरसा/चरागन भूमि दर्ज है, वहां भू-माफियाओं ने रेरा अधिनियम 2016 को ठेंगा दिखाते हुए बिना रेरा पंजीयन, बिना ले-आउट स्वीकृति और बिना भू-परिवर्तन कॉलोनी काट दी। पानी टंकी के आसपास, धरमु सरोवर और वर्मा कृषि फार्म हाउस के समीप इस सरकारी जमीन पर न सिर्फ प्लॉट काटे गए, बल्कि अवैध रजिस्ट्री और बैनामा तक कराए जा चुके हैं।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पूरा अवैध कारोबार स्थानीय पटवारी और आरआई की जानकारी में चल रहा है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक संरक्षण की ओर साफ इशारा करता है। आरोप हैं कि पंचायत के कुछ जनप्रतिनिधियों और राजस्व अमले की मिलीभगत से सरकारी जमीन को निजी संपत्ति की तरह बेचा जा रहा है।
रेरा अधिनियम में बिना पंजीयन प्लाटिंग पर भारी जुर्माना, परियोजना निरस्तीकरण और जेल तक का प्रावधान है, लेकिन लटुवा में कानून सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रहा है। जिला प्रशासन और रेरा प्राधिकरण की निष्क्रियता अब संदेह के घेरे में है।
शिकायतकर्ताओं ने खसरा नंबर 839 की अवैध प्लाटिंग पर तत्काल रोक, सभी विक्रय निरस्त करने और दोषी पटवारी, राजस्व अधिकारियों व संलिप्त जनप्रतिनिधियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला कलेक्टर और रेरा प्राधिकरण भू-माफियाओं पर कार्रवाई करेंगे या सरकारी जमीन की यह लूट यूं ही जारी रहेगी