ग्राम पंचायत डोंगरीडीह में मुक्तिधाम के पास अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कराया गया बोर खनन कार्य अब सवालों के घेरे में है। 15वें वित्त आयोग (जिला पंचायत विकास योजना) के तहत वर्ष 2024-25 में स्वीकृत ₹1.00 लाख की राशि से यह कार्य कराया गया, लेकिन ज़मीनी हकीकत पूरी तरह इसके उलट है।
कार्य एजेंसी ग्राम पंचायत डोंगरीडीह द्वारा 4 फरवरी 2025 को शुरू कर 17 जून 2025 को पूर्ण दर्शाया गया यह बोर खनन आज भी अनुपयोगी पड़ा है। बोर से पानी निकालने के लिए न तो मोटर लगाई गई है और न ही हैंडपंप, जिससे पेयजल उपलब्ध कराने का उद्देश्य पूरी तरह विफल हो गया है।
इतना ही नहीं, सुरक्षा मानकों की भी खुली अनदेखी की गई है। बोर खनन के बाद जहां लोहे की कैप लगाई जानी चाहिए थी, वहां केवल एक प्लास्टिक की बोरी से बोर को बांधकर छोड़ दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कोई भी व्यक्ति बोरी हटाकर बोर में पत्थर या कचरा डाल सकता है, जिससे बोर के खराब होने और भविष्य में दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
सरपंच पंकज घृतलहरे और सचिव तीरथ बंजारे के कार्यकाल में हुए इस काम पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों में नाराज़गी है कि अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्य के नाम पर सरकारी पैसे की केवल औपचारिकता पूरी की गई, जबकि न सुविधा मिली और न ही सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस लापरवाही और संभावित आर्थिक अनियमितता पर जिला प्रशासन कार्रवाई करेगा, या फिर मुक्तिधाम के नाम पर किया गया यह बोर खनन कागज़ों तक ही सीमित रह जाएगा?