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“गौरव पथ” बना शर्म का रास्ता: दो दिन में दरकी सीसी रोड, मजगांव में घटिया निर्माण का खुला खेल

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कवर्धा। कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत चंदैनी के आश्रित ग्राम मजगांव में “गौरव पथ योजना” के तहत बनाई गई सीसी रोड निर्माण के महज दो दिन बाद ही दरक गई। सड़क के बीचों-बीच उभरी लंबी दरारों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नई सड़क की यह हालत न केवल तकनीकी लापरवाही की ओर इशारा करती है, बल्कि पूरे निर्माण तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।

मौके पर ली गई तस्वीरों में स्पष्ट दिख रहा है कि सड़क की सतह पर सीधी लंबी क्रैक लाइन पड़ चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि सीसी रोड में निर्धारित अनुपात में सीमेंट-कंक्रीट मिश्रण, पर्याप्त मोटाई, उचित कम्पैक्शन और समय पर क्योरिंग (पानी डालकर मजबूती देने की प्रक्रिया) नहीं की जाती, तो शुरुआती दिनों में ही दरारें उभर आती हैं। यहां भी प्रथम दृष्टया यही स्थिति दिखाई दे रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई। यदि सड़क दो दिन में ही फट जाए, तो यह स्पष्ट संकेत है कि या तो बेस लेयर ठीक से तैयार नहीं की गई या कंक्रीट की गुणवत्ता मानक अनुरूप नहीं थी। ग्रामीणों ने इसे सीधे-सीधे जनधन की बर्बादी करार दिया है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निर्माण स्थल पर नागरिक सूचना पटल तक नहीं लगाया गया है। किसी भी शासकीय निर्माण कार्य में योजना का नाम, स्वीकृत राशि, कार्य प्रारंभ एवं पूर्णता तिथि, क्रियान्वयन एजेंसी और तकनीकी अधिकारी की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य होता है। सूचना पटल का अभाव पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है और यह शासकीय दिशा-निर्देशों की अवहेलना माना जाता है। ग्रामीणों को यह तक जानकारी नहीं है कि सड़क कितनी लागत से बनी और किस विभाग या एजेंसी द्वारा बनाई गई।

ग्राम पंचायत क्षेत्र में चल रहा यह निर्माण कार्य स्पष्ट रूप से ग्रामीण विकास से संबंधित है। ऐसे कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण की जिम्मेदारी संबंधित जनपद पंचायत, तकनीकी सहायक, उप अभियंता और क्रियान्वयन एजेंसी की होती है। पंचायत राज व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक निर्माण कार्य की मापन पुस्तिका (एमबी) संधारित की जाती है तथा तकनीकी निरीक्षण आवश्यक होता है। यदि निर्माण के तुरंत बाद ही सड़क में दरारें आ जाएं, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होना स्वाभाविक है।

निर्धारित मानकों के अनुसार सीसी रोड निर्माण में स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप मोटाई (आमतौर पर लगभग 150 मिमी या परियोजना अनुसार), उपयुक्त ग्रेड का कंक्रीट, समुचित कम्पैक्शन और कम से कम 7 से 14 दिन तक नियमित क्योरिंग अनिवार्य है। साथ ही, कार्य पूर्ण होने के बाद गुणवत्ता परीक्षण और तकनीकी प्रमाणन भी जरूरी है। यदि इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया, तो यह सीधी लापरवाही मानी जाएगी।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण सामग्री का लैब परीक्षण कराया जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, क्षतिग्रस्त सड़क को हटाकर पुनः गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए।

मजगांव की यह दरकी सड़क सिर्फ एक निर्माण की खामी नहीं, बल्कि व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करती है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो “गौरव पथ” जैसी योजनाएं गांवों में विकास की बजाय अविश्वास की राह बनाती नजर आएंगी।

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