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चरडोंगरी में ‘कागज़ी दो दीवार’ का खेल! 7.88 लाख की योजना में एक ही वाल खड़ा कर पूरा भुगतान 

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मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना के तहत ग्राम पंचायत चरडोंगरी में स्वीकृत ताली (नाली) निर्माण कार्य अब गंभीर सवालों के घेरे में है। वर्ष 2024-25 के लिए 7.88 लाख रुपये की स्वीकृति के साथ 07-06-2025 से 13-08-2025 के बीच कार्य पूर्ण दर्शाया गया है। कार्य एजेंसी के रूप में सरपंच, ग्राम पंचायत चरडोंगरी तथा जनपद पंचायत कवर्धा का नाम दर्ज है। लेकिन स्थल की स्थिति और सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त दस्तावेजों ने निर्माण और भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां सामने रख दी हैं।

उक्त नाली निर्माण कार्य सुकदेव के घर से भोगेश्वर के घर तक, तालाब किनारे कराया गया है। स्थल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि जहां दो साइड वॉल (दीवार) प्रस्तावित थीं, वहां केवल एक साइड वॉल का निर्माण किया गया है। दूसरी ओर तालाब में निर्मित रिटर्निंग वॉल को नाली की दूसरी दीवार के रूप में समाहित कर भुगतान आहरित कर लिया गया। तकनीकी दृष्टि से यह दो अलग प्रकृति के कार्य हैं, जिन्हें एक ही मद में जोड़ना वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।

सूचना के अधिकार से प्राप्त अभिलेखों के अनुसार, नाली के एक वाल का निर्माण कर दोनों वाल का मूल्यांकन और सत्यापन दर्शाते हुए पूर्ण राशि आहरण कर ली गई। माप पुस्तिका (एमबी) में दो दीवारों का उल्लेख किया गया है, जबकि भौतिक स्थिति अलग संकेत देती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मापन, सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही अथवा मिलीभगत की आशंका बनती है। जनपद स्तर पर तकनीकी परीक्षण और भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

यह पूरा मामला इसलिए और संवेदनशील हो जाता है क्योंकि यह क्षेत्र प्रदेश के पंचायत मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। ऐसे क्षेत्र में विकास कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और वित्तीय अनुशासन की अपेक्षा और अधिक रहती है। यदि जमीनी स्तर पर इस प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो यह शासन की साख और निगरानी व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 तथा शासकीय वित्तीय नियमों के अनुसार किसी भी निर्माण कार्य का भुगतान केवल वास्तविक, मापित और प्रमाणित कार्य के आधार पर किया जा सकता है। लोक निर्माण विभाग के तकनीकी मानकों के तहत नाली निर्माण में दोनों साइड वॉल का होना आवश्यक होता है, जिससे संरचना सुरक्षित और टिकाऊ रहे। एक दीवार के स्थान पर तालाब की रिटर्निंग वॉल को जोड़कर भुगतान लेना नियमानुकूल नहीं माना जा सकता। यदि दस्तावेजों में वास्तविकता से भिन्न प्रविष्टि की गई है, तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का प्रकरण बनता है।

ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि कागजों में दर्ज निर्माण और धरातल पर मौजूद कार्य के बीच अंतर की तकनीकी जांच कराई जाए तथा दोषियों के विरुद्ध वसूली और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

 जिला स्तर पर एक स्वतंत्र जांच टीम गठित करने की मांग तेज हो गई है। मांग की जा रही है कि जिला प्रशासन, जिला पंचायत और तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम बनाकर स्थल निरीक्षण, माप पुस्तिका का सत्यापन, स्वीकृत एस्टीमेट का मिलान तथा भुगतान अभिलेखों की ऑडिट जांच कराई जाए। जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे और भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सके।

अब प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी है। 7.88 लाख की इस परियोजना का वास्तविक मूल्यांकन और जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है, ताकि जनहित की राशि का दुरुपयोग न हो और विकास कार्यों में विश्वास कायम रह सके।

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