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स्क्रीन पर फर्जी भुगतान, जेब में नगदी; 40 हजार ठगने वाला शातिर गिरफ्तार

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कवर्धा। फर्जी PhonePe रिसीविंग दिखाकर लोगों से नगदी ऐंठने वाले शातिर आरोपी जेम्स हालदार को कबीरधाम पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी डिजिटल भुगतान का झांसा देकर सामने वाले को फर्जी रिसीविंग दिखाता और रकम खाते में आए बिना ही नगदी लेकर निकल जाता था। पुलिस जांच में कबीरधाम जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में उसके खिलाफ चार प्रकरण सामने आए हैं। इन मामलों में कुल 40 हजार रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है।

मामला पिपरिया थाना क्षेत्र के ग्राम परसवारा का है। यहां सूरज पटेल के पास मोटरसाइकिल से पहुंचे आरोपी ने अपना नाम जेम्स बताया। उसने PhonePe के जरिए भुगतान करने के बदले नगद राशि देने की बात कही। इसके बाद PhonePe स्कैनर स्कैन कर भुगतान पूर्ण होने की फर्जी रिसीविंग दिखाई। रिसीविंग को सही मानकर सूरज पटेल ने उसे पांच हजार रुपये नगद दे दिए।

बाद में खाते की जांच करने पर रकम जमा नहीं होने का पता चला। इसके बाद ठगी का खुलासा हुआ और पिपरिया थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना और पिपरिया पुलिस की संयुक्त टीम ने आरोपी की तलाश शुरू की। तकनीकी सुरागों के आधार पर पुलिस ने जेम्स हालदार निवासी दाढ़ी, जिला बेमेतरा को कवर्धा के सिग्नल चौक के पास गिरफ्तार कर लिया।

चार मामलों में 40 हजार की ठगी

पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ पिपरिया थाने में पांच हजार रुपये, दशरंगपुर चौकी क्षेत्र में आठ हजार रुपये तथा सहसपुर लोहारा थाने में 20 हजार और सात हजार रुपये की ठगी के मामले दर्ज हैं। इस तरह चार मामलों में कुल 40 हजार रुपये की ठगी सामने आई है। पूछताछ में आरोपी ने इंटरनेट के जरिए फर्जी डिजिटल पेमेंट और रिसीविंग के तरीके सीखने की जानकारी दी। अन्य जिलों में भी उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज होने की बात सामने आई है।

मोबाइल, आईफोन और बाइक जब्त

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से ठगी की पांच हजार रुपये की नगदी, एक Vivo मोबाइल, एक iPhone और घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल क्रमांक CG 25 R 3782 जब्त की है। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर न्यायालय में पेश किया गया।

रिसीविंग नहीं, खाते में रकम देखना जरूरी

कबीरधाम पुलिस ने नागरिकों को डिजिटल भुगतान में सतर्क रहने की अपील की है। PhonePe, Google Pay अथवा किसी अन्य माध्यम की स्क्रीन पर दिखाई गई रिसीविंग को भुगतान प्राप्त होने का प्रमाण न मानें। नगदी या सामान देने से पहले अपने बैंक खाते अथवा UPI में वास्तविक ट्रांजैक्शन की पुष्टि करें।

पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं। थोड़ी सी सावधानी से फर्जी डिजिटल भुगतान के जरिए होने वाली ठगी से बचा जा सकता है

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