एनआरसी में कम से कम 10 बच्चों की भर्ती, पोषण ट्रेकर में शत-प्रतिशत एंट्री के निर्देश
जिले में कुपोषण की रोकथाम और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर जिला प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने जिला कार्यालय के सभाकक्ष में महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक लेकर कुपोषित एवं गंभीर कुपोषित बच्चों की स्थिति, पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी), आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थाओं की व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
कलेक्टर ने कहा कि कुपोषण की रोकथाम और प्रत्येक नागरिक को सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ मैदानी स्तर पर नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान सभी आंगनबाड़ी एवं स्वास्थ्य केंद्रों में शुद्ध पेयजल, विद्युत, पहुंचमार्ग और स्वच्छता सहित आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। जहां कमी है, वहां संबंधित विभाग आपसी समन्वय से शीघ्र व्यवस्था दुरुस्त करेंगे।
गंभीर कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान और भर्ती
जिले में कुपोषित एवं गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या की समीक्षा करते हुए उनकी नियमित निगरानी और समय पर उपचार सुनिश्चित करने को कहा गया। गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर एनआरसी में भर्ती कराने के निर्देश दिए गए।
सभी पोषण पुनर्वास केंद्रों में निर्धारित क्षमता के अनुरूप बच्चों की भर्ती सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक एनआरसी में कम से कम 10 बच्चों की भर्ती बनाए रखने के निर्देश दिए गए। एनआरसी में भर्ती बच्चों को दिए जाने वाले पोषण आहार, भोजन की गुणवत्ता और देखभाल व्यवस्था की भी नियमित निगरानी की जाएगी।
बच्चों को दिए जाने वाले पौष्टिक आहार और उसकी उपयोगिता की जानकारी देने वाला वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से प्रसारित करने के निर्देश दिए गए, ताकि माताओं और अभिभावकों को पोषण तथा कुपोषण से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया जा सके।
माताओं और अभिभावकों की जागरूकता पर जोर
बैठक में कहा गया कि कुपोषण की रोकथाम केवल उपचार तक सीमित नहीं है। परिवार और समुदाय की जागरूकता भी महत्वपूर्ण है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले को माताओं को संतुलित आहार, स्तनपान, स्वच्छता, नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार के प्रति लगातार जागरूक करने के निर्देश दिए गए।
मध्यम एवं गंभीर कुपोषित बच्चों की नियमित निगरानी के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति, पोषण आहार वितरण और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों की भी नियमित समीक्षा की जाएगी।
स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाओं पर भी निगरानी
स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले मरीजों को आवश्यक जांच, उपचार, दवाइयां एवं अन्य स्वास्थ्य सेवाएं समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य संस्थाओं में मानव संसाधन, दवाइयों, उपकरणों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करने को कहा गया।
ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में बच्चों और महिलाओं तक स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने तथा जरूरतमंद हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें समय पर सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।
पोषण ट्रेकर में शत-प्रतिशत एंट्री अनिवार्य
पोषण ट्रेकर एप में सभी आवश्यक जानकारियों की शत-प्रतिशत एवं समय पर एंट्री सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। आंगनबाड़ी केंद्रों की गतिविधियों एवं हितग्राहियों से संबंधित जानकारी नियमित रूप से अपडेट करने को कहा गया।
बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में पूरा करने तथा कार्यों में लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए गए। महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग को आपसी समन्वय से कार्य करते हुए कुपोषण की रोकथाम और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।