कवर्धा – त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की बिगुल बज चुका है। पंचायतों में प्रवर्गवार आरक्षण जारी होते ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पंच, सरपंच, जनपद सदस्य और जिला पंचायत सदस्य बनने और चुनावी दावेदारी की लंबी सूची देखने को मिल रहा है। ऐसे में कबीरधाम जिले की राजनीति में अनेकों राजनीतिक पंडितों और विशेषज्ञों की गुणा भाग, जोड़ तोड़ शुरू हो गया है। जिले में सभी दलों के वरिष्ठ एवं कद्दावर नेताओं की दावेदारी ने जन मानस में राजनीतिक हलचल को बढ़ा दिया है। ऐसे में कबीरधाम के जन जन के लोकप्रिय जन नायक रामकुमार सिन्हा की चर्चा गांव गांव, शहर शहर, वार्ड वार्ड और हर राजनीतिक दलों में न हो संभव ही नहीं है। कबीरधाम के वनांचल से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी राजनीति से सत्ता, सरकार, पक्ष और विपक्ष को अपनी पंचायतीराज अधिनियम और राजनीतिक बुद्धिमत्ता का लोहा मनवाने वाले रामकुमार सिन्हा की चर्चा स्वभाविक है।
आखिर रामकुमार सिन्हा है कौन
कबीरधाम जिले का ऐसा कोई गांव नहीं, चाहे वह सुदूर दुर्गम पहाड़ी वनांचल इलाका हो, चाहे विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा हो, चाहे मैदानी क्षेत्र हो सभी जगह आम नागरिकों के हृदय में जन सेवक की अमिट छाप है। ज्ञात हो कि रामकुमार सिन्हा ने विगत 15 वर्षों से मनरेगा मजदूरों के मजदूरी भुगतान में विलंब भुगतान के लिए 1 लाख से अधिक मजदूरों को क्षतिपूर्ति का अवॉर्ड पारित कराया। यह पूरे भारत वर्ष का पहला और ऐतिहासिक मजदूर अधिकारों का सराहनीय प्रयास था। जिसकी संघर्ष वह आज भी लड़ रहे हैं। ऐसे ही अनेकों कार्य जनता को सामाजिक न्याय एवं उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए कर रहे हैं। रामकुमार सिन्हा सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा,स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, बेहतर समाज के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। रामकुमार सिन्हा जिले के ऐसे निष्ठावान जनप्रतिनिधि है जो पंचवर्षीय चुनावी हार जीत की राजनीति से परे हैं। उनका संपूर्ण जीवन सिर्फ और सिर्फ जनसेवा और जनसेवा है।
इसी बात को सिद्ध करते हुए उनके क्षेत्र के जनता ने यही विश्वास जताया और उसे पूरा साकार भी कर रहे हैं। इसी लिए रामकुमार सिन्हा अपने जनपद क्षेत्र से लगातार 4 बार (दो बार रामकुमार सिन्हा एवं दो बार उनकी धर्मपत्नी शिवरानी सिन्हा) से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। जहां किसी जनप्रतिनिधि को जनपद सदस्य के लिए दुबारा चुनाव जीतना नामुमकिन होता है ऐसे कठिन और राजनीतिक दलों के दबाव के बीच जनता का अपना सच्चा सेवक को लगातार 4 बार यानी 20 वर्षों से लोग चुनाव जीता रहें हैं। यह उनकी और जनता का अभूतपूर्व स्नेह, जुड़ाव और निष्ठापूर्वक जन सेवा का ही परिणाम है।
जनपद या जिला पंचायत का चुनाव लड़ सकते है रामकुमार
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 इस बार का आरक्षण बहुत ही रोचक और कड़े मुकाबले वाली है। रामकुमार सिन्हा जी का जनपद क्षेत्र अनारक्षित मुक्त है, वहीं इस बार जनपद क्षेत्र वाली जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 11 भी अन्य पिछड़ा वर्ग मुक्त हुआ है। इसी से लगे जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 10 अनारक्षित मुक्त हुआ है। इससे क्षेत्र में रामकुमार सिन्हा के समर्थकों और आम जनता बहुत उत्सुक और खुश है कि रामकुमार सिन्हा जी को बड़े नेतृत्व की जिम्मेदारी देना चाहते हैं। इससे इस क्षेत्र की राजनीतिक दलों और राजनीतिक नेताओं की धड़कन तेज हो गई है। क्योंकि रामकुमार सिन्हा की कर्मठता, राजनीतिक कुशलता के साथ साथ जनता से सीधा आत्मीय संबंध की कोई तोड़ नहीं है। अब सवाल रामकुमार सिन्हा से है कि वह जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ते हैं तो क्षेत्र क्रमांक 10 या 11 को चुनते हैं। यदि अपने परम्परागत जनपद क्षेत्र से सदस्य का चुनाव लड़कर पुनः 5 वीं बार जनपद सदस्य बनकर लोगों की सेवा करते रहेंगे। अब तो जनता जनार्दन का आशीर्वाद ही तय करेगा कि रामकुमार सिन्हा जिला पंचायत में या जनपद पंचायत में से किसे चुनकर जनता की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं के अनुरूप लोगों की जन सेवा और उनके अधिकारों की संघर्ष को जारी रखेंगे। यह तो चुनाव परिणाम ही बताएगा जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार रहेगा।



