कवर्धा, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कवर्धा जनपद के ग्राम बिरकोन में निर्मित अमृत सरोवर न सिर्फ जल संरक्षण का आदर्श उदाहरण बनकर उभरा है, बल्कि यह ग्रामीणों के लिए रोजगार और सतत आजीविका का केंद्र भी बन गया है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वीकृत इस अमृत सरोवर का निर्माण 8 दिसंबर 2024 को प्रारंभ हुआ और अब पूर्ण हो चुका है। कुल 9.71 लाख रुपये की स्वीकृत लागत में से 6.16 लाख रुपये की राशि में यह निर्माण कार्य संपन्न हुआ, जिसमें मजदूरी पर लगभग 1.65 लाख रुपये और सामग्री पर 4.5 लाख रुपये व्यय किए गए।
20 एकड़ क्षेत्र में फैले इस जलस्रोत के निर्माण से गांव के 324 पंजीकृत परिवारों के 689 श्रमिकों को रोजगार मिला, जिनकी मजदूरी राशि सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। सरोवर के चारों ओर कराए गए वृक्षारोपण से क्षेत्र का पर्यावरण और अधिक हराभरा और स्वच्छ बन गया है।
इस सरोवर की देखरेख की जिम्मेदारी मां चंद्रहासिनी महिला स्व-सहायता समूह को सौंपी गई है, जिसने छह महीने पूर्व मछली पालन की शुरुआत की। रोहू, कतला और मृगल जैसी लोकप्रिय मछलियों के उत्पादन से अब तक 1.20 लाख रुपये की आमदनी हो चुकी है। गांव के ही बाजार में मछलियां 80 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही हैं, जिससे समूह की दसों महिलाएं आत्मनिर्भर बनती जा रही हैं।
अमृत सरोवर में लगभग 5 लाख घन मीटर जल संग्रहण क्षमता है, जिससे आसपास के 50 एकड़ क्षेत्र में भू-जल स्तर में वृद्धि हुई है। हैंडपंप और ट्यूबवेल में पानी की उपलब्धता बेहतर हुई है और सिंचाई के लिए भी नए अवसर खुले हैं।
मनरेगा का उद्देश्य केवल रोजगार देना नहीं, बल्कि ऐसी टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करना है जो दीर्घकालीन विकास में सहायक हों। ग्राम बिरकोन का अमृत सरोवर इसका सशक्त उदाहरण है, जिसने जल संरक्षण, पर्यावरण सुधार, ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तिकरण—इन सभी को एकसाथ साधने का कार्य किया है।






