नेउर के घने जंगलों से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक नन्हे हिरण की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मृत हिरण का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। हिरण के शरीर पर चोट के निशान मिले हैं, जिससे वन अमला इसे शिकार या हमले का मामला मानकर जांच कर रहा है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी (पंडरिया पश्चिम) ने जानकारी दी कि मृत हिरण का पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारणों का पता चलेगा। विभाग ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। नेउर जंगल क्षेत्र में शव मिलने के बाद घटनास्थल की घेराबंदी कर ग्रामीणों और संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है। हालांकि अभी तक किसी व्यक्ति ने प्रत्यक्ष रूप से घटना को होते नहीं देखा है और संदेहियों से पूछताछ की जा रही है।
वन विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि हिरण की मौत मानवजनित कारणों या अवैध शिकार से जुड़ी पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 और वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। संरक्षित वन्य प्राणी की हत्या को गंभीर अपराध मानते हुए दोषियों को तीन से सात वर्ष की सजा और आर्थिक जुर्माने का प्रावधान है।
परिक्षेत्र अधिकारी ने कहा कि वनों की सुरक्षा और वन्य जीव संरक्षण के लिए विभाग पूरी तरह सतर्क है। नेउर के जंगल में हुई इस घटना ने वन्य प्राणियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल विभाग को दें।
फिलहाल हिरण की मौत रहस्य बनी हुई है, लेकिन वन विभाग का कहना है कि जल्द ही सच्चाई सामने लाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।