कवर्धा। देश के वन्यजीव संरक्षण तंत्र पर करारा सवाल खड़ा करते हुए भोरमदेव अभ्यारण्य में करंट बिछाकर दो इंडियन बायसन/गौर (अनुसूची-I) के शिकार का बड़ा मामला सामने आया है। संरक्षित क्षेत्र के बीचोबीच इस जघन्य अपराध ने यह उजागर कर दिया कि अभ्यारण्य में गश्त व्यवस्था लगभग नाम मात्र की रह गई है, जबकि विभाग के पास गश्ती वाहन उपलब्ध है।

चिल्फी परिक्षेत्र के कक्ष पी.एफ.-333 बहनाखोदरा में शिकारी न सिर्फ बिजली का जाल बिछाते रहे बल्कि दो गौर को मारकर उनके मांस को टुकड़ों में काटकर बाँटते भी रहे—परंतु उस दौरान वन रक्षक मुख्यालय में थे, फील्ड में नहीं। यह लापरवाही किसी भी अभ्यारण्य सुरक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने के लिए पर्याप्त है।



