नगर पंचायत पांडातराई में खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध एकमात्र हाईस्कूल खेल मैदान आज बदहाली का प्रतीक बन चुका है। कभी पूरे तहसील में अपनी पहचान रखने वाला यह मैदान अब प्रशासनिक उपेक्षा और राजनीतिक अनदेखी का शिकार होकर खिलाड़ियों को अभ्यास से दूर कर रहा है। हालात ऐसे हैं कि युवा खिलाड़ी मैदान की दुर्दशा देखकर यहां आने से कतराने लगे हैं।
वार्ड क्रमांक 4 में स्थित इस खेल मैदान में पूर्व में कई प्रतिष्ठित खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन हो चुका है और अनेक खिलाड़ियों ने यहीं से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। लेकिन वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है। मैदान असमतल, उबड़-खाबड़ और जलभराव से ग्रस्त है। बारिश के दिनों में मैदान तालाब में तब्दील हो जाता है, जिससे खिलाड़ियों को बिना अभ्यास लौटने को मजबूर होना पड़ता है।
खिलाड़ियों का कहना है कि सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है। शाम ढलते ही मैदान असामाजिक तत्वों और शराबियों का अड्डा बन जाता है, जिससे सुरक्षा और खेल का माहौल दोनों प्रभावित हो रहे हैं। दौड़ और शारीरिक प्रशिक्षण करने वाले युवाओं को चोट और मोच का खतरा बना रहता है। विशेषकर सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की तैयारी कर रहे युवाओं को अभ्यास के लिए उपयुक्त स्थान नहीं मिल पा रहा है।
गौरतलब है कि नगर के खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए यही एकमात्र मैदान है, लेकिन संरक्षण और विकास के अभाव में इसकी हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया मैदान आज खुद अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। चारों ओर बिखरी मिट्टी और गिट्टी, समुचित ड्रेनेज का अभाव और रखरखाव की कमी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही है।
इस उपेक्षा को लेकर नगरवासियों और खेल प्रेमियों में गहरा रोष व्याप्त है। पुष्पेंद्र पटेल, टार्जन साहू, नितेश कुंभकार, चंदन लंहगीर, प्रदीप निषाद, उदय चौहान, राहुल लंहगीर सहित अनेक युवाओं और नागरिकों ने प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं।
नगरवासियों का कहना है कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पांडातराई की खेल प्रतिभाएं दम तोड़ देंगी। खेल प्रेमियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि नगर में शीघ्र एक स्थायी स्टेडियम या आधुनिक खेल परिसर की स्थापना की जाए, ताकि युवाओं को बेहतर माहौल और सुविधाएं मिल सकें और क्षेत्र की खेल प्रतिभा को नया आयाम मिल सके।