कवर्धा। नेशनल हाईवे के किनारे बसा छोटा सा गांव पोड़ी इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आबादी कम, गांव छोटा और पास में ही पुलिस चौकी संचालित—इसके बावजूद यहां नकली शराब का विशाल नेटवर्क लंबे समय तक बिना रोक-टोक चलता रहा। इस खुलासे ने खुफिया तंत्र और आबकारी विभाग की भारी लापरवाही को उजागर कर दिया है।
झारखंड से दो सप्लायर गिरफ्तार—फर्जी शराब फैक्ट्री की जड़ें बाहर तक
कबीरधाम पुलिस ने जमशेदपुर (झारखंड) जाकर दो बड़े सप्लायर—
• राकेश कोहली
• मोहन प्रसाद गुप्ता
को गिरफ्तार किया।
जांच में पता चला कि पोड़ी में सिर्फ छोटी-मोटी मिलावट नहीं, बल्कि पूरी तरह योजनाबद्ध “नकली शराब फैक्ट्री सिस्टम” चलाया जा रहा था।
मोहन गुप्ता कोलकाता से स्पिरिट मंगवाता था, जबकि राकेश कोहली पहले झारखंड में नकली शराब बनाकर यहां के गिरोह को ट्रेनिंग देकर गया था।
गांव छोटा, चौकी पास—फिर भी नेटवर्क चलता रहा बेखौफ
पोड़ी में लगातार—
स्पिरिट की खेप आती रही
जाली स्टिकर, ढक्कन, बोतलें पहुंचती रहीं
बड़ी मात्रा में नकली शराब तैयार होती रही
बाहरी सप्लाई चलती रही
इतनी हलचल के बावजूद न स्थानीय पुलिस, न खुफिया इकाई, न आबकारी विभाग—किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह प्रशासनिक ढांचे की सबसे बड़ी विफलता उजागर करता है।
स्थानीय पकड़े गए आरोपी सिर्फ मोहरे—पीछे था बड़ा इंटर-स्टेट गैंग
पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी—नंद कुमार, सुद्दू, साजिद, दिनेश, ईदरिस खान—सिर्फ स्थानीय स्तर के सदस्य थे। असली मास्टरमाइंड और सप्लाई चैन झारखंड व कोलकाता से संचालित हो रहा था।
नकली ढक्कन, स्टिकर और स्पिरिट बसों के जरिए पोड़ी तक पहुंच रही थी—सिस्टम फिर भी सोता रहा।
कार्रवाई मजबूत, लेकिन सवाल उससे बड़े
कबीरधाम पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई कर गिरोह को तोड़ने की शुरुआत कर दी है, लेकिन गंभीर सवाल अब भी कायम हैं—
इतने बड़े पैमाने पर नकली शराब बनाने का खेल इतने दिनों तक चलता कैसे रहा?
निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी?
आबकारी विभाग और खुफिया एजेंसी क्या कर रही थी?
NH किनारे और पुलिस चौकी पास—फिर भी प्रशासन बेखबर क्यों?
यह मामला सिर्फ अपराध नहीं, पूरा सिस्टम एक्सपोज़ हुआ है
प्रदेश में कानून-व्यवस्था और नजरदारी की स्थिति पर यह बड़ा सवाल खड़ा करता है। जनता पूछ रही है—
“NH पर इतनी हलचल के बावजूद जब एक गांव में फर्जी शराब फैक्ट्री चल सकती है, तो बाकी जगह क्या सुरक्षित है?”