प्रसिद्ध भोरमदेव महोत्सव के अंतर्गत आयोजित सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक एवं शास्त्रीय सांस्कृतिक परंपराओं की शानदार झलक देखने को मिली। स्थानीय और विभिन्न जिलों से आए कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत ग्राम बरपानी के कलाकार मोहन द्वारा विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के पारंपरिक नृत्य से हुई। इस लोकनृत्य ने आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करते हुए दर्शकों का भरपूर ध्यान आकर्षित किया।
इसके बाद कवर्धा और बोड़ला स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने “रामेश्वरम दर्शन” और “नरसिंह अवतार” पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। छात्राओं की भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया और दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की।
शास्त्रीय नृत्य की कड़ी में रायपुर की अक्षिता दुबे और कवर्धा की दुर्गेश्वरी चंद्रवंशी ने मनमोहक कत्थक नृत्य प्रस्तुत किया। उनके सधे हुए कदमों और आकर्षक मुद्राओं ने दर्शकों से जमकर तालियां बटोरीं।
इसी क्रम में बिलासपुर के युवराज सिंह लोनिया ने सुमधुर भजन प्रस्तुत कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक रंग दिया, वहीं अध्या पांडे ने भरतनाट्यम की उत्कृष्ट प्रस्तुति देकर अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में मोहम्मद असन की वाद्य प्रस्तुति भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उनकी मधुर धुनों पर दर्शक झूम उठे और पूरा माहौल सांस्कृतिक उल्लास से भर गया।
भोरमदेव महोत्सव की इस सांस्कृतिक संध्या ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, शास्त्रीय कला और प्रतिभाशाली कलाकारों की विविधता को मंच प्रदान करते हुए दर्शकों को एक यादगार सांस्कृतिक अनुभव दिया।