टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत कवर्धा जिले की 84 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया। इस उपलब्धि पर पीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित सम्मान समारोह में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने पंचायत प्रतिनिधियों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट किए। मितानिन, स्वास्थ्यकर्मी और सामाजिक संस्थाओं को भी उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर गोसेवा आयोग अध्यक्ष विशेषर पटेल, सीजीएमएससी बोर्ड अध्यक्ष दीपक महसके, कलेक्टर गोपाल वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष चंदप्रकाश चंद्रवंशी सहित जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
जिले के पंडरिया विकासखंड की 28, बोड़ला की 23, सहसपुर लोहारा की 19 और कवर्धा विकासखंड की 14 पंचायतें टीबी मुक्त घोषित की गई हैं। कलेक्टर गोपाल वर्मा के नेतृत्व में जिले में निक्षय मित्र योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, जिसमें दवा के साथ-साथ पोषण भी उपलब्ध कराया गया। स्वयं कलेक्टर ने टीबी मरीजों को गोद लेकर प्रोटीनयुक्त आहार प्रदान किया।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जिंदा गांव प्रदेश का पहला ऐसा गांव बना जहां टीबी मुक्त प्रमाण पत्र सौंपा गया। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि शासन, प्रशासन और समाज के समन्वित प्रयासों का परिणाम है, जिससे पूरे प्रदेश को दिशा मिली है।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए जिला अस्पताल में 4.5 करोड़ की लागत से सीटी स्कैन मशीन स्थापित की गई है। कवर्धा में 220 बिस्तरों वाला अस्पताल और 50 सीटों वाला मेडिकल कॉलेज भी शुरू किया जा रहा है। 38 डॉक्टरों की नियुक्ति पूरी हो चुकी है और सभी कार्यरत हैं।
वनांचल क्षेत्रों में सोनोग्राफी सेवा शुरू की गई है, जिससे अब तक 717 महिलाओं की जांच हो चुकी है। मोबाइल नेत्र जांच वैन के जरिए दुर्गम क्षेत्रों में मोतियाबिंद की जांच और इलाज किया जा रहा है। कैंसर से बचाव के लिए स्कूलों में संवाद कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।
आयुष्मान योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में पहले 10 मेडिकल कॉलेज थे, अब उनकी संख्या बढ़कर 15 हो चुकी है। कवर्धा को भी इसका लाभ मिला है, जहां मेडिकल कॉलेज की स्थापना सवा 300 करोड़ की लागत से हो रही है। टेंडर जारी हो चुका है।
डॉक्टर्स डे पर 700 डॉक्टरों की नियुक्ति हुई, जिसमें कवर्धा को 38 नए डॉक्टर मिले। नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 8 से बढ़ाकर 20 की जा रही है। फिजियोथैरेपी, योग-नेचुरोपैथी और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी संस्थान खोले जा रहे हैं।
मितानिनों के मानदेय के संबंध में स्वास्थ्य मंत्री ने भरोसा दिलाया कि भुगतान समय पर किया जाएगा। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे ‘निक्षय मित्र’ बनें और टीबी मरीजों की मदद करें, क्योंकि यह लड़ाई केवल सरकार की नहीं, पूरे समाज की