कबीरधाम में धान खरीदी का गणित इन दिनों सरकारी कागजों से ज्यादा कुर्सी के कानों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जिले के 108 धान उपार्जन केंद्रों के भौतिक सत्यापन में महज 39 केंद्रों में ही रिकॉर्ड के अनुरूप धान का स्टॉक मिला, जबकि 69 केंद्रों में धान की कमी सामने आई। अब सवाल यह है कि आखिर रिकॉर्ड में मौजूद धान मौके से कम कैसे हो गया।
मामला सामने आने के बाद 1 अगस्त को कलेक्टर गोपाल वर्मा ने संबंधित अधिकारियों और समिति प्रबंधकों को सात दिन के भीतर शेष धान का शत-प्रतिशत निराकरण कर स्टॉक जीरो करने का अल्टीमेटम दिया है। आदेश सख्त है, लेकिन कुर्सी के कानों में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है—जब भौतिक सत्यापन में मौके पर धान पहले ही कम मिल चुका है, तो अब ‘जीरो स्टॉक से स्टॉक जीरो’ आखिर किस हिसाब-किताब से होगा।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में जिले के 108 केंद्रों में कुल 63,72,351 क्विंटल धान खरीदा गया। इनमें से 52 केंद्रों से शत-प्रतिशत उठाव हो चुका है, जबकि 56 केंद्रों में अभी भी 40,733 क्विंटल धान का निराकरण शेष बताया गया है।
गड़बड़ी के मामले में बम्हनी बोड़ला, लोहारा, बासिनझोरी, बीरनपुरकला, पेंड्रिकला और कुकदूर के समिति प्रबंधकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। कुछ अन्य के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित है। लेकिन 69 केंद्रों में कमी सामने आने के बाद छह एफआईआर का आंकड़ा भी कई सवाल छोड़ रहा है।
कबीरधाम पहले भी धान खरीदी में ‘मुसुवा खा गए’ जैसी चर्चाओं के कारण सुर्खियों में रहा है। अब फिर धान के आंकड़े और जमीन की हकीकत आमने-सामने खड़ी है।
सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए भी है क्योंकि यह वही जिला है जहां पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, दो सांसद, उत्कृष्ट विधायक भावना बोहरा तथा दो कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त नेताओं सहित कई राजनीतिक दिग्गजों की मौजूदगी है। इसके बावजूद 108 में से 69 केंद्रों पर स्टॉक में कमी मिलना व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कुर्सी के कान अब पूछ रहे हैं—सात दिन में सिर्फ स्टॉक जीरो होगा या उन जिम्मेदार लोगों का हिसाब भी जीरो से शुरू होकर पूरा निकलेगा। क्योंकि धान का बोरा गायब हो सकता है, लेकिन जनता की नजर नहीं।