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36 किमी की रोमांचक जंगल सफारी के लिए तैयार भोरमदेव वन्य जीव अभयारण्य, प्रकृति प्रेमियों को मिलेगा अनूठा अनुभव

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कबीरधाम जिले का प्रसिद्ध भोरमदेव वन्य जीव अभयारण्य अब एक नई पहचान की ओर अग्रसर है। यहां 36 किलोमीटर लंबी बहुप्रतीक्षित जंगल सफारी की शुरुआत के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वन विभाग द्वारा मार्ग का सुव्यवस्थित विकास, सुरक्षा मानकों का पालन और पर्यटक सुविधाओं का विस्तार सुनिश्चित किया गया है। जल्द ही पर्यटक इस प्राकृतिक धरोहर के बीच रोमांचक सफर का आनंद ले सकेंगे।

जंगल सफारी का प्रारंभ करिया आमा क्षेत्र से होगा, जहां से घने वनों की हरियाली और शांत वातावरण पर्यटकों का स्वागत करेगा। सफारी मार्ग को इस तरह तैयार किया गया है कि पर्यटक जंगल की वास्तविक जैव विविधता, भौगोलिक विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकें। 36 किलोमीटर का यह सफर प्रकृति के करीब ले जाने वाला विशेष अनुभव साबित होगा।

इस सफारी की सबसे खास विशेषता है जीवनदायिनी सकरी नदी को 22 बार पार करना। नदी के उथले प्रवाह के बीच से गुजरते वाहन, दोनों ओर फैले वृक्षों की कतारें और पक्षियों की मधुर ध्वनि इस यात्रा को यादगार बना देती है। नदी पार करने का यह अनूठा अनुभव भोरमदेव की सफारी को अन्य स्थानों से अलग पहचान देता है।

मार्ग में बाजार डोंगरी, भाई-बहन पहाड़, भावर टोक, दूरदूरी झरना और दूरदूरी ग्रासलैंड जैसे प्राकृतिक स्थल शामिल हैं। भावर टोक में सकरी और दूरदूरी नदी का संगम अत्यंत मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करता है। दूरदूरी झरना अपनी प्राकृतिक धारा और हरियाली के कारण सुकून का एहसास कराता है, जबकि दूरदूरी ग्रासलैंड खुले मैदानों के कारण वन्यजीवों के अवलोकन के लिए उपयुक्त स्थान माना जा रहा है।

वन्यजीवों की दृष्टि से अभयारण्य अत्यंत समृद्ध है। यहां तितलियों की अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं, जो इस क्षेत्र की जैव विविधता को दर्शाती हैं। इसके अलावा हिरण, चीतल, मयूर, बाज, तोता, भालू, बायसन और बारहसिंगा जैसे वन्यजीव यहां सहज रूप से देखे जा सकते हैं। कान्हा क्षेत्र से जुड़े वन क्षेत्र होने के कारण यहां टाइगर और तेंदुआ की उपस्थिति भी संभावित है, जिससे सफारी का रोमांच और बढ़ जाता है।

वन विभाग ने सफारी संचालन के लिए प्रशिक्षित गाइड और निर्धारित मार्ग की व्यवस्था की है, जिससे पर्यटक सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से भ्रमण कर सकें। पर्यटकों को जंगल की शांति और स्वच्छता बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। 

इको-टूरिज्म की भावना को ध्यान में रखते हुए प्रकृति संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन को प्राथमिकता दी जा रही है।

इस पहल से स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। गाइड, वाहन चालक, स्थानीय उत्पादों की बिक्री और पर्यटन से जुड़ी अन्य सेवाओं में भागीदारी से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इससे स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ेगी और पर्यटन के माध्यम से विकास की नई राह खुलेगी।

भोरमदेव की यह जंगल सफारी प्रकृति, रोमांच और जैव विविधता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगी। घने जंगल, नदी-नाले, पहाड़ियां और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास पर्यटकों को एक अलग ही अनुभव देगा। आने वाले समय में यह सफारी न केवल कबीरधाम बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख आकर्षण के रूप में उभरेगी।

प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों और साहसिक यात्रियों के लिए यह स्थान निश्चित रूप से नई संभावनाओं का द्वार खोलेगा। 36 किलोमीटर का यह रोमांचक सफर भोरमदेव को इको-टूरिज्म के क्षेत्र में नई ऊंचाई प्रदान करने जा रहा है।

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