प्रदेश में 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचते तापमान और संभावित हीटवेव के खतरे के बीच आंगनवाड़ी केंद्रों को भी ग्रीष्मकालीन अवकाश देने की मांग उठने लगी है। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ की प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया मेरावी ने राज्य सरकार से तत्काल निर्णय लेने की अपील की है।
सोनिया मेरावी ने बयान जारी कर कहा कि जब भीषण गर्मी को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा स्कूलों में अवकाश घोषित किया जा चुका है, तब 3 से 6 वर्ष तक के छोटे बच्चों के लिए संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों को खुला रखना जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि छोटे बच्चे लू और डिहाइड्रेशन की चपेट में जल्दी आते हैं, वहीं कार्यकर्ता और सहायिकाएं भी तेज धूप में केंद्र संचालन और घर-घर संपर्क के दौरान प्रभावित होती हैं।
संघ की ओर से मांग की गई है कि अप्रैल – मई-जून की तीव्र गर्मी के दौरान आंगनवाड़ी केंद्रों में भी अस्थायी अवकाश घोषित किया जाए या कम से कम संचालन समय को सुबह के ठंडे घंटों (07 से 09 बजे ) तक सीमित किया जाए। साथ ही यह भी सुझाव दिया गया कि पूरक पोषण आहार और टेक-होम राशन का वितरण तय तिथियों पर या घर-घर पहुंचाकर किया जा सकता है, ताकि बच्चों का पोषण प्रभावित न हो।
सोनिया मेरावी ने कहा कि आंगनवाड़ी व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों और माताओं का स्वास्थ्य सुदृढ़ करना है, न कि उन्हें जोखिम में डालना। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ से आग्रह किया कि वर्तमान मौसम परिस्थिति की समीक्षा कर त्वरित निर्णय लिया जाए।
उधर, अभिभावकों के बीच भी चिंता बढ़ रही है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्र भवनों में पंखा-कूलर जैसी पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, जिससे दोपहर के समय तापमान और अधिक असहनीय हो जाता है।
हीटवेव की चेतावनी के बीच अब नजर इस बात पर है कि सरकार आंगनवाड़ी बच्चों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाती है। फिलहाल, संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आगे की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा।