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“2 कट्टी शक्कर” का हिसाब मांगा तो वेयरहाउस गेट पर बर्बर हमला! PDS में ‘भंडारण सिंडिकेट’ बेखौफ, अतरिया खुर्द में कानून को खुली चुनौती

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कबीरधाम की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता की मांग करना अब जोखिम भरा साबित हो रहा है। अतरिया खुर्द के उचित मूल्य दुकान से जुड़े विक्रेता पर वेयरहाउस गेट के बाहर संगठित हमला इस बात का संकेत है कि राशन भंडारण में गड़बड़ियों को उजागर करना कुछ लोगों को नागवार गुजर रहा है। सवाल साफ है—क्या “2 कट्टी शक्कर” का हिसाब मांगना इतना बड़ा अपराध है कि बीच सड़क पर पीट दिया जाए।

24 मार्च: कमी पकड़ी, विवाद शुरू

24 मार्च 2026 को ड्राइवर जेठूराम अपने हमालों के साथ अतरिया खुर्द दुकान में राशन खाली करने पहुंचा। आरोप है कि शक्कर 2 कट्टी कम उतारी गई। विक्रेता ने पंचनामा देने से इनकार किया और कमी का विरोध दर्ज कराया। इसी बात पर कथित गाली-गलौज हुई। मामला ट्रांसपोर्टर कालू शर्मा तक पहुंचा और दो दिन बाद 2 कट्टी शक्कर वापस की गई।

यानी कमी की पुष्टि हुई—पर इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे सिस्टम की साख पर सवाल खड़े कर दिए।

19 अप्रैल: घात लगाकर हमला

19 अप्रैल को शेष भंडारण के लिए सूचना मिलने पर विक्रेता वेयरहाउस मोहतरा पहुंचे। आरोप है कि करीब 25 हमाल-ड्राइवर गेट के पास संगठित होकर बैठे थे। जैसे ही विक्रेता राशन लोड कर बाहर निकले, 24 मार्च की घटना से जुड़े तीन हमालों ने उन्हें मोटरसाइकिल से गिराकर ताबड़तोड़ मारपीट शुरू कर दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाकी लोग मूकदर्शक बने रहे। बीच-बचाव एक राहगीर और एक अन्य हमाल ने किया, तब जाकर हमलावर भागे। यह घटना वेयरहाउस गेट जैसे संवेदनशील परिसर के बाहर हुई—जहां सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होती है।

“तौलकर दो” कहने पर धमकी

दुकानदारों का आरोप है कि द्वार प्रदाय योजना के तहत दुकान पर तौलकर सामग्री देने का नियम है, लेकिन जब वे तौल की मांग करते हैं तो बहाने, दबाव और धमकी शुरू हो जाती है। कमी पकड़ने पर विवाद खड़ा कर दिया जाता है, ताकि भविष्य में कोई सवाल न उठाए।

यदि यह सच है, तो यह केवल मारपीट नहीं—बल्कि पारदर्शिता के खिलाफ सुनियोजित दबाव की रणनीति है। अंततः कमी का दोष दुकानदार पर ही मढ़ दिया जाता है और गरीब हितग्राहियों के हिस्से का राशन बीच में ही “गायब” हो जाता है।

संघ का अल्टीमेटम: दुकानें बंद होंगी

घटना के बाद राशन दुकानदार संघ ने कड़ी कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि दोषियों पर सख्त कदम नहीं उठे, तो दुकानें बंद रखने का निर्णय लागू किया जाएगा। इसका सीधा असर हजारों गरीब परिवारों पर पड़ेगा—पर जिम्मेदार कौन होगा।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (SDO), कलेक्टर, खाद्य अधिकारी और नागरिक आपूर्ति निगम तक पहुंचाई गई है। लेकिन अब तक हमलावरों की पहचान, गिरफ्तारी या वेयरहाउस सुरक्षा को लेकर ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई।

वेयरहाउस गेट पर 25 लोगों का जमावड़ा कैसे हुआ।

क्या सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित है ।

क्या भंडारण प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट होगा।

क्या कमी की घटनाओं की विभागीय जांच होगी।

यदि 2 कट्टी शक्कर की वापसी के बाद भी बदले की कार्रवाई होती है, तो यह साफ संकेत है कि सिस्टम के भीतर कोई “भंडारण सिंडिकेट” सक्रिय है, जो नियमों से ऊपर खुद को समझता है।

कबीरधाम में यह घटना सिर्फ एक विक्रेता पर हमला नहीं, बल्कि PDS की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है। प्रशासन के लिए यह अग्निपरीक्षा है—या तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई कर कानून का राज स्थापित करे, या फिर स्वीकार करे कि राशन

व्यवस्था में भय और दबाव का बोलबाला है।

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