कवर्धा। आधुनिक जीवनशैली, बढ़ते तनाव, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक समस्याओं के बीच योग आज केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन का प्रभावी दर्शन बनकर उभरा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्राचीन योग परंपरा को जिस सम्मान के साथ स्वीकार किया जा रहा है, उसी कड़ी में कबीरधाम जिले के कवर्धा नगर में पंतजलि योग समिति द्वारा वर्षों से संचालित निःशुल्क योग कक्षाएं लोगों के लिए स्वास्थ्य, अनुशासन और मानसिक शांति का मजबूत आधार बन रही हैं।
नगर के सिग्नल चौक स्थित शारदा संगीत महाविद्यालय परिसर में प्रतिदिन सुबह 5 बजे से 7 बजे तक नियमित योग प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें शहर के विभिन्न वर्गों के लोग उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। खास बात यह है कि यहां योग पूरी तरह निःशुल्क सिखाया जाता है और अनेक लोग इससे शारीरिक व मानसिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
पंतजलि योग समिति के अध्यक्ष सुरेश चन्द्रवंशी ने बताया कि योग भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा की अमूल्य देन है। हजारों वर्षों से भारत योग के क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शन करता आया है। उन्होंने कहा कि महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में “योग कर्मसु कौशलम” कहकर योग के महत्व को स्पष्ट किया था, जिसका अर्थ है कि योग व्यक्ति को हर कार्य में कुशल बनाता है। आज वही भारतीय योग संस्कृति पूरी दुनिया को स्वस्थ जीवन का संदेश दे रही है।
उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने की प्रक्रिया है। नियमित योगाभ्यास से शरीर मजबूत बनता है, मन शांत रहता है और व्यक्ति मानसिक रूप से अधिक स्थिर एवं सकारात्मक महसूस करता है। लगातार योग करने वाले लोगों में तनाव, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह जैसी समस्याओं में भी सुधार देखा जा रहा है।
योग प्रशिक्षण में शामिल नागरिकों का कहना है कि नियमित अभ्यास से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं। कई लोग जो पहले तनाव, थकान और शारीरिक पीड़ा से परेशान रहते थे, अब स्वयं को अधिक ऊर्जावान और स्वस्थ महसूस कर रहे हैं। योग के माध्यम से लोगों में अनुशासन, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन भी विकसित हो रहा है।
योग प्रशिक्षक सुरेश चन्द्रवंशी के मार्गदर्शन में प्रतिदिन विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान की विधियां कराई जाती हैं। वर्तमान में भीषण गर्मी और नौतपा को देखते हुए विशेष रूप से शीतली, शीतकारी और चंद्रभेदी प्राणायाम का अभ्यास कराया जा रहा है, जिससे शरीर को शीतलता मिलती है तथा गर्मी से राहत प्राप्त होती है। योग विशेषज्ञों के अनुसार ये प्राणायाम शरीर के तापमान को नियंत्रित करने, मानसिक तनाव कम करने और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं।
समिति द्वारा संचालित यह योग केंद्र अब केवल अभ्यास का स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली का प्रेरणास्रोत बन चुका है। यहां बुजुर्गों से लेकर युवाओं और महिलाओं तक सभी वर्गों की सहभागिता देखने को मिल रही है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग योग सीखने पहुंच रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।
श्री चंद्रवंशी का कहना है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में योग एक प्रभावी औषधि के रूप में कार्य कर रहा है। यह न केवल शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, बल्कि जोड़ों में लचीलापन बनाए रखने, पाचन तंत्र को बेहतर करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक है। साथ ही नियमित ध्यान और प्राणायाम मानसिक एकाग्रता को बढ़ाते हैं तथा व्यक्ति को सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करते हैं।
कवर्धा में पंतजलि योग समिति का यह प्रयास सामाजिक स्वास्थ्य अभियान के रूप में सामने आ रहा है। जहां एक ओर देशभर में योग को वैश्विक पहचान मिल रही है, वहीं स्थानीय स्तर पर ऐसे प्रयास भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को मजबूत करने का कार्य कर रहे हैं।
“तन और मन को जो स्वस्थ बनाता है, वही योग कहलाता है” — इस संदेश को आत्मसात करते हुए पंतजलि योग समिति लगातार लोगों को स्वस्थ, जागरूक और सकारात्मक जीवन की ओर प्रेरित कर रही है। कवर्धा का यह योग अभियान निश्चित रूप से समाज को स्वस्थ भारत की दिशा में आगे बढ़ाने वाला प्रेरणादायी उदाहरण बनता जा रहा है। चन्द्रवशी द्वारा भीषण गर्मी (नौतपा) से बचने के लिए अभी विशेष रूप से शीतली शीतकारी एवं चंद्रभेदी प्राणायाम कराया जा रहा है ।