कवर्धा। कबीरधाम जिले में कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि अब लोग अपने घर और दुकानों में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। जिले के पांडातराई क्षेत्र में दिनदहाड़े हुई चैन स्नैचिंग की घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। बदमाशों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे भीड़भाड़ वाले मुख्य मार्गों पर भी वारदात को अंजाम देने से नहीं डर रहे।
जानकारी के अनुसार पांडातराई नगर के मुख्य मार्ग पर अमरावतीन बाई बंजारे अपनी छोटी सी किराना दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करती हैं। रोज की तरह वह दुकान में बैठी हुई थीं। इसी दौरान दो युवक मुंह पर कपड़ा बांधकर दुकान पहुंचे। दोनों ने पहले बीड़ी और नशीले पदार्थ खरीदने का बहाना बनाया तथा आसपास का माहौल देखने लगे। महिला कुछ समझ पाती, उससे पहले बदमाशों ने अचानक उनके गले में पहनी करीब आठ माशा वजन की चार पत्ती सोने की चैन झपट ली और मौके से फरार हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित महिला के अनुसार दोनों युवक वारदात के बाद पंडरिया मार्ग की ओर तेजी से भाग निकले। घटना इतनी तेजी से हुई कि आसपास मौजूद लोग भी कुछ समझ नहीं पाए। दिनदहाड़े हुई इस वारदात के बाद पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब बाजार क्षेत्र में भी महिलाएं और व्यापारी सुरक्षित नहीं रह गए हैं।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि लगातार बढ़ रहे नशे के कारोबार ने अपराध को बढ़ावा दिया है। नगर और ग्रामीण इलाकों में खुलेआम नशीले पदार्थों की उपलब्धता के कारण युवा अपराध की राह पकड़ रहे हैं। छोटी-मोटी चोरी से शुरू हुआ अपराध अब लूट और चैन स्नैचिंग जैसी घटनाओं तक पहुंच चुका है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में हालात और भयावह हो सकते हैं।
घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि बदमाशों के भीतर पुलिस का भय लगभग समाप्त हो चुका है। यही कारण है कि अपराधी अब खुलेआम वारदात को अंजाम देकर आसानी से फरार हो रहे हैं।
पांडातराई जैसे शांत माने जाने वाले क्षेत्र में इस प्रकार की घटना ने यह साफ कर दिया है कि जिले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आम नागरिक अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और लोगों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर जब दिनदहाड़े दुकान में बैठी महिला सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता खुद को किस भरोसे सुरक्षित माने।