कवर्धा में कानून व्यवस्था लगातार कठघरे में खड़ी नजर आ रही है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि अब सत्ता पक्ष भारतीय जनता पार्टी से जुड़े जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी भी सुरक्षित नहीं दिखाई दे रहे। सप्ताह भर पहले छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त बिसेसर पटेल पर शराबियों द्वारा हमला किए जाने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब जिला पंचायत सदस्य राजकुमार मेरावी और उनके साथियों पर हमला हो गया। लगातार हो रही घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार 22 जून 2026 को रामकुमार मरकाम अपने साथियों तथा जिला पंचायत सदस्य राजकुमार मेरावी के साथ कवर्धा से रेंगाखार लौट रहे थे। इसी दौरान भोरमदेव पैलेस के पास आरोपियों ने वाहन रोककर विवाद शुरू किया। इसके बाद सरोधा नहर पुलिया तिराहा स्थित बजरंगबली मंदिर के पास दोबारा वाहन रोककर गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और मारपीट की गई।
घटना का सबसे गंभीर पहलू तब सामने आया जब बीच-बचाव करने पहुंचे जिला पंचायत सदस्य राजकुमार मेरावी के खिलाफ आरोपियों ने कथित रूप से जातिसूचक टिप्पणियां कर अनुसूचित जनजाति समाज का अपमान किया। यह घटना केवल मारपीट तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था दोनों पर सीधा हमला मानी जा रही है।
मामले में पांच आरोपी— गोकुल कौशिक, गोविंद कौशिक, रामानुज कौशिक, सागर साहु और आलोक तिवारी गिरफ्तार किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि गृह मंत्री के अपने निर्वाचन क्षेत्र में यदि भाजपा के जनप्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाएं संकेत दे रही हैं कि केवल दावे और भाषणों से कानून व्यवस्था नहीं सुधरेगी। जनता अब जवाब चाहती है कि आखिर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं और उन पर प्रभावी नियंत्रण कब होगा।