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मुख्यालय पर नहीं रुकते अधिकारी व कर्मचारी , सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग 

कवर्धा , जिला तथा विकासखंड मुख्यालय स्थित कार्यालय में अनेक अधिकारी व कर्मचारी मुख्यालय पर नहीं रुकते। वहीं सरकारी मशीनरी का भी दुरूपयोग किया जा रहा है। छुट्टी (शुक्रवार)के समय अनेक सरकारी गाड़ियां अधिकारियों व कर्मचारियों को लेकर दूसरे जिलों में भी जाती हैं। सभी कर्मचारियों को सरकार द्वारा अपने मुख्यालय पर रुकने के लिए बाकायदा तनख्वाह के साथ मकान का किराया भत्ता भी दिया जाता है। यह किराया भत्ता कर्मचारी ही बेसिक पेय की 10 प्रतिशत राशि किराया भत्ता के लिए दी जाती है। यह राशि प्रत्येक कर्मचारी को हजारों रुपये में मिलती हैं, लेकिन कर्मचारी व अधिकारी इस राशि को अपनी जेब में डाल लेते हैं। मुख्यालय पर न रूक कर अपने घरों में ही विश्राम फरमाते हैं।
मुख्यालय में रहने से परहेज
 जिला कलेक्टर कार्यालय के अलावा विकासखंड बोडला , कवर्धा, सहसपुर लोहारा , पंडरिया में कार्यरत विभिन्न अधिकारियों के कार्यालयों के अधिकारी और कर्मचारी अपने मुख्यालय पर नहीं रुक रहे हैं। सरकारी गाड़ियों को झूठे टूर बनाकर दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले कर्मचारी व अधिकारी अपने घरों पर भी ले जाते हैं। कुछ अधिकारी कर्मचारी तो जिला मुख्यालय से आना जाना करते है तो कुछ अन्य जिलों से आना जाना करते है । बोडला विकासखंड के जनपद पंचायत के मुख्यकार्यपालन अधिकारी के अलावा अन्य अधिकारी मुख्यालय तो क्या कार्यालय में भी नही मिलते ।
पटवारी और सचिव के चलते ग्रामीणों को ज्यादा होता है परेशानी
पटवारियों के लिए हल्का मुख्यालय में कार्यालय सह निवास बनाया गया है लेकिन वहा पर नही रुकते बल्कि कई हल्का में बने कार्यालयों का महीनों तक दरवाजा भी नही खुलता तो कई हल्का का भवन खंडहर में तब्दील हो गया है । ठीक उसी प्रकार ग्राम पंचायत के मुख्यालयों में बने पंचायत भवनों और पंचायत सचिवों का है । ग्राम पंचायत वाशियो के द्वारा अपने कार्यों के लिए भटकते रहते है जबकि इन कर्मचारियों के काम काज के दिन और दिनांक भी तय है बावजूद परहेज करते है।
मुख्यलय में रहने के लिए फरमान की आवश्यकता
राज्य सरकार के अलावा कलेक्टर और अलावा सक्षम आधिकारी के द्वारा समय समय पर तरह तरह के आदेश , निर्देश जारी किया जाता है लेकिन उन सभी आदेशों की अवहेलना होना आम बात हो गई है । जिससे जिम्मेदार अधिकारी भी अनजान नही है बावजूद कोई ठोस कार्यवाही नहीं होती।जिसके चलते जरूरत मंद और आम जन परेशान हो जाते हैं ।जिम्मेदार आम लोगो की परेशानी को लेकर गंभीर नहीं होता जबकि उनको पता है कि उनकी नियुक्ति उन्ही के कार्यों को करने के लिए हुई है ।

 

 

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