जिले के लछनपुर मार्ग पर स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर से मूर्ति चोरी की घटना ने न सिर्फ स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि एक गहरे सवाल को भी जन्म दिया है – क्या अब आस्था भी सुरक्षित नहीं ।
जिस मंदिर की नींव स्वर्गीय लतेलराम पाल के परिजनों ने 30 जून 2020 को श्रद्धा और जनकल्याण की भावना से रखी थी, वही आज अपनी आत्मा से वंचित हो चुका है। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राहगीरों और स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए एक सुरक्षा कवच बन चुका था। आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं से बचाव और मानसिक शांति के लिए यह स्थल एक सच्चे सहारे के रूप में खड़ा था।
बीते दिन की शाम जब पुजारी पूजा-अर्चना के बाद लौटे, तब शायद किसी ने सोचा भी नहीं था कि कुछ ही देर में मंदिर की प्राणवंत मूर्ति वहां नहीं होगी। राहगीरों की नजर जब खाली चौकी पर पड़ी, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। वह मूर्ति, जिसमें श्रद्धालुओं ने अपनी भावनाएं, आस्थाएं और कीमती चढ़ावे समर्पित किए थे – चांदी की आंखें, सोने-चांदी के लॉकेट – अब वहां नहीं थी।
इस घटना से सिर्फ एक धार्मिक मूर्ति चोरी नहीं हुई है, बल्कि उन अनगिनत भावनाओं पर भी प्रहार हुआ है, जो वर्षों से इस स्थान से जुड़ी थीं। मंदिर समिति और स्थानीय हिंदू संगठनों में गहरा आक्रोश है, और अब लोगों की मांग है कि इस अपराध को सिर्फ चोरी के तौर पर नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और धार्मिक अपराध के रूप में देखा जाए।
पुलिस और क्राइम ब्रांच मुंगेली की टीमें जांच में जुटी हैं, लेकिन अब यह केवल मूर्ति की वापसी का मामला नहीं, बल्कि लोगों के टूटे विश्वास को फिर से जोड़ने की चुनौती भी बन चुका है।