किसानों की वर्षों की मांग और आंदोलनों के बाद पंडरिया विधायक भावना बोहरा के प्रयासों से स्वीकृत नहर निर्माण कार्य अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। बकेला, देवसरा और लिंहाईपुर गांव के पास निर्माणाधीन नहर की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों और किसानों में जबरदस्त आक्रोश है। शुरुआती चरण में ही नहर की लाइनिंग दरारों से भरी हुई है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
उदेराम के खेत के पास पुलिया के आगे भारी दरारें
लिंहाईपुर नाला के समीप, उदेराम के खेत के पास बनी पुलिया के ठीक आगे नहर की दीवारों में जगह-जगह दरारें देखने को मिल रही हैं। कार्य स्थल पर मौजूद ठेकेदार के सुपरवाइजर ने उक्त स्थान को ‘चैन 75’ बताते हुए माना कि दरारें मौजूद हैं और कहा कि “बाद में ठीक कर ली जाएंगी”।
लेवलिंग में भी भारी गड़बड़ी, जल प्रवाह पर संकट
स्थानीय किसानों ने बताया कि नहर की सतह असमान है और लेवलिंग का कार्य बेहद लापरवाही से किया गया है। ऐसे में आगे तक जल प्रवाह सुचारु रूप से संभव नहीं हो पाएगा। किसानों ने यह भी आरोप लगाए कि यदि प्रारंभिक बिंदु पर ही कार्य मानकों से परे है, तो आगे की स्थिति और भी चिंताजनक होगी।
ठेकेदार की रॉयल्टी कटेगी
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अनुविभागीय अधिकारी शर्मा ने कहा कि दरारों को जल्द दुरुस्त कराया जाएगा और दोषी ठेकेदार की रॉयल्टी तथा भुगतान में कटौती की जाएगी। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे बयान हर निर्माण कार्य में दिए जाते हैं, परंतु धरातल पर सुधार दिखाई नहीं देता।
विधायक भावना बोहरा की साख पर असर
पंडरिया विधायक भावना बोहरा की छवि एक तेजतर्रार और जनसेविका की रही है, लेकिन उनके निर्वाचन क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से उनकी साख को भी नुकसान पहुंच रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि विधायक द्वारा स्वीकृत कराए गए कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण में गंभीर चूक हुई है।
पंडरिया क्षेत्र में कई नहरों का यही हाल
यह कोई अकेला मामला नहीं है। पंडरिया क्षेत्र में निर्माणाधीन कई अन्य नहरों और सिंचाई परियोजनाओं में भी इसी प्रकार की अनियमितता देखने को मिली है। अधूरे कार्य, घटिया सामग्री और विभागीय लापरवाही अब आम बात हो गई है।
किसानों को होगा सीधा नुकसान
किसानों का कहना है कि यदि यह नहर समय रहते ठीक नहीं हुई, तो खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए सिंचाई संकट खड़ा हो जाएगा। इससे फसल उत्पादन पर असर पड़ेगा और उनकी मेहनत व्यर्थ जाएगी।
सरकार और प्रशासन को अब लेनी होगी जवाबदेही
किसानों की उम्मीदों के साथ हो रहा यह खिलवाड़ यदि समय रहते नहीं रोका गया, तो यह मामला केवल निर्माण की लापरवाही नहीं, बल्कि जन प्रतिनिधित्व की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल बन जाएगा।