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उच्च स्तरीय शिकायत : रिटायरमेंट से पहले वनपाल पर गंभीर घोटाले का आरोप, विभाग मौन

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भोरमदेव अभ्यारण्य में पदस्थ वनपाल हनुमान दास मानिकपुरी पर आदिवासी हितग्राहियों के नाम पर आई शासकीय राशि को अपने परिजनों के खातों में डालवाने का गंभीर आरोप सामने आया है। यह मामला जामुनपानी सर्किल का है, जहां विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत आदिवासी ग्रामीणों को रोजगार व विकास के लिए लाखों रुपये की राशि दी जानी थी। लेकिन वनपाल द्वारा इस राशि को लाभार्थियों तक पहुँचाने की बजाय अपने बेटे और बहू के निजी बैंक खातों में ट्रांसफर करवा दिया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, वनपाल के बेटे महेश दास के खाते (नं. 87130100008433) और बहू सरस्वती बाई के खाते (नं. 87130100008431), जो बैंक ऑफ बड़ौदा की उड़िया शाखा में हैं, में सरकारी राशि ट्रांसफर की गई। इस संबंध में बैंक स्टेटमेंट भी संलग्न कर 14 मई 2025 को कवर्धा के वनमंडलाधिकारी को लिखित शिकायत की गई है। इसमें स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया है कि सरकारी धन का दुरुपयोग कर शासन को आर्थिक क्षति पहुँचाई गई है।
वनमंडलाधिकारी का कहना है कि मामले की जांच के लिए सहसपुर लोहारा के एसडीओ को निर्देशित किया गया है और रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है। लेकिन दो सप्ताह बीतने के बावजूद अब तक न कोई प्राथमिक कार्रवाई हुई है और न ही कोई स्पष्ट रिपोर्ट सामने आई है। इस बीच, यह जानकारी सामने आई है कि आरोपित वनपाल हनुमान दास मानिकपुरी 31 मई 2025 को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं, जिससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि विभाग इस मामले को टालने की कोशिश कर रहा है ताकि रिटायरमेंट के बाद यह मामला स्वतः कमजोर हो जाए।
शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि हो सकता है कि सिर्फ बेटे-बहू ही नहीं, बल्कि अन्य करीबियों के खातों में भी सरकारी धन स्थानांतरित किया गया हो। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच होनी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके। उन्होंने यह मामला 27 मई को छत्तीसगढ़ राज्य के वन मंत्री को भी सौंपा है और तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
यह मामला केवल एक कर्मचारी के भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। जब शासकीय योजनाएं गरीबों और वंचितों के लिए बनाई जाती हैं, तो ऐसे अफसरों द्वारा की गई गड़बड़ी न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है बल्कि यह सामाजिक अन्याय भी है।
अब देखना यह है कि शासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है। क्या विभाग रिटायरमेंट से पहले वनपाल के खिलाफ सख्त कदम उठाएगा, या यह मामला भी कागजों में दब कर रह जाएगा ।

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