कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा क्षेत्र में प्रशासनिक निगरानी के अभाव में अवैध उत्खनन और ईंट भट्टा संचालन का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। स्थिति यह है कि सैकड़ों की संख्या में अवैध ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं, जबकि राजस्व अमला जिला मुख्यालय में निवास करता है। क्षेत्रीय प्रशासनिक ढांचे की इस विफलता ने माफियाओं को बेखौफ बना दिया है।
जिम्मेदार अधिकारी मुख्यालय से गायब
स्थानीय स्तर पर तैनात राजस्व निरीक्षक और पटवारी, जिनकी जिम्मेदारी क्षेत्र की निगरानी और कार्रवाई है, वे स्वयं स्थायी रूप से जिला मुख्यालय में निवास कर रहे हैं। इसका सीधा प्रभाव क्षेत्र में प्रशासनिक उपस्थिति पर पड़ा है, जिससे अवैध गतिविधियों को खुली छूट मिल रही है।
टीम विहीन अधिकारी लाचार
ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अवैध उत्खनन एवं ईंट निर्माण का कार्य रात के समय अधिक सक्रिय रहता है। जेसीबी, ट्रैक्टर , हाईवा और अन्य भारी वाहनों के माध्यम से मिट्टी , रेत , मुरूम का दोहन किया जा रहा है। अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की कोशिशें टीम की अनुपलब्धता या सुरक्षा कारणों का हवाला देकर टाल दी जाती हैं।
शासन की चुप्पी पर सवाल
बिना अनुमति संचालित ईंट भट्टों से न केवल प्राकृतिक संसाधनों की बर्बादी हो रही है, बल्कि पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। धुएं, धूल और मिट्टी के अत्यधिक दोहन से खेतिहर भूमि प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद अब तक किसी स्तर पर प्रभावी रोकथाम नहीं की गई है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की अपेक्षा जताई है। उनका कहना है कि यह केवल स्थानीय लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित तंत्र है, जिसे राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है।
क्या प्रशासनिक अमले की कार्यशैली पर पुनर्विचार नहीं होना चाहिए।
क्या मुख्यालय से दूर रहकर क्षेत्रीय जिम्मेदारियों का निर्वहन संभव है ।
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है यह अवैध कारोबार ।