जिले में अवैध शराब का कारोबार बेखौफ जारी है। कवर्धा जिला मुख्यालय से लेकर दूरदराज के वनांचल इलाकों तक शराब माफिया सक्रिय हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग मौन साधे हुए हैं। जिला मुख्यालय के विभिन्न वार्डों में कोचिया खुलेआम शराब की बिक्री कर रहे हैं। यही नहीं, पंडरिया, बोडला, सहसपुर लोहारा और कवर्धा विकासखंडों में भी अवैध शराब का नेटवर्क जड़े जमा चुका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे आबकारी विभाग राजस्व वृद्धि के नाम पर इस अवैध कारोबार को नजरअंदाज कर रहा हो। विभाग की कार्रवाई नगण्य है। कभी-कभार पुलिस छापेमारी करती है, जिससे कुछ वक्त के लिए गतिविधियां धीमी हो जाती हैं, लेकिन फिर वही हालात बहाल हो जाते हैं।
शहर के वार्डों, कस्बों और साप्ताहिक बाजारों में अवैध शराब खुलेआम बिक रही है, पर आबकारी विभाग की उपस्थिति का कोई अता-पता नहीं है। लोगों को अब यह भी संदेह है कि जिले में आबकारी विभाग है भी या नहीं, क्योंकि हर कार्रवाई का जिम्मा केवल पुलिस ही निभा रही है।
आबकारी विभाग की सक्रियता केवल वनांचल क्षेत्रों तक सीमित रह गई है, जहां समय-समय पर महुआ और लहान जब्त कर वाहवाही लूटी जाती है। जबकि असल चुनौती तो शहर और कस्बों में फैलते इस काले कारोबार को रोकने की है, जिस पर अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।
कबीरधाम जिले के चारों विकासखंडों — पंडरिया, बोडला, सहसपुर लोहारा और कवर्धा — में तेजी से फैलते अवैध शराब व्यापार पर अंकुश लगाने की मांग जोर पकड़ रही है। आम नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो सामाजिक ताना-बाना बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।