घरेलू कलह और सामाजिक तनाव की दो सनसनीखेज हत्याएं सामने आई हैं, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। एक मामले में सास के तानों और मानसिक उत्पीड़न से परेशान बहू ने कुल्हाड़ी से वार कर सास की हत्या कर दी, वहीं दूसरे मामले में मामूली विवाद को लेकर एक पिता-पुत्र ने मिलकर ग्रामीण की सरेराह हत्या कर दी।
शादी के 8 साल बाद भी संतान नहीं हुई तो सास कहती थी ‘बांझ हो’, तानों से टूटकर बहू ने की हत्या
बालोद थाना क्षेत्र के बघमरा गांव में 10 जून की रात 35 वर्षीय खिलेश्वरी देवांगन ने अपनी सास गीता बाई देवांगन (58) की धारदार हसिया से वार कर हत्या कर दी। पूछताछ में बहू ने बताया कि शादी के 8 साल बीतने के बावजूद बच्चा न होने पर सास उसे ‘बांझ’ कहकर अपमानित करती थी और बेटे से दूसरी शादी करने का दबाव डालती थी। पति भी सास के उकसावे पर बहू से मारपीट करता था। घटना की रात जब सास ने फिर ताने मारे, तो गुस्से में आकर बहू ने हसिए से ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर दी।
वारदात के बाद बहू ने मोहल्ले वालों को गुमराह करने के लिए कहा कि सास ने खुद को चाकू से घायल कर लिया है, लेकिन पुलिस की सख्त पूछताछ में वह टूट गई और जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी महिला को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
रनचिरई में विवाद बना जानलेवा: पिता-पुत्र ने ग्रामीण की कर दी हत्या
इसी दिन दूसरे मामले में रनचिरई थाना क्षेत्र के खुटेरी गांव में देवव्रत बिरझर नामक ग्रामीण की हत्या कर दी गई। आरोप है कि गांव के सुदामा ठाकुर और उनके बेटे ने मिलकर देवव्रत पर हमला किया। पुलिस के अनुसार, मृतक द्वारा मीटिंग में सुदामा के बेटे को लेकर की गई आलोचना और झगड़े के बाद उसने पुलिस में शिकायत की थी। इस पर बौखलाए पिता-पुत्र ने पहले उसे धमकाया और फिर सरेराह हमला कर उसकी जान ले ली।
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या का मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई कर रही है।
इन दोनों घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि घरेलू कलह, सामाजिक ताने और अपमानजनक व्यवहार किस हद तक हिंसा को जन्म दे सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संवाद की उपेक्षा आज भी अनेक हत्याओं की पृष्ठभूमि बन रही है।