राज्य शासन की बहुचर्चित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अंतर्गत संचालित “चावल उत्सव” योजना अब हितग्राहियों के बजाय राशन दुकानदारों और बिचौलियों के लिए लाभ का जरिया बन चुकी है। शासन द्वारा बारिश के मौसम को देखते हुए कार्डधारकों को तीन महीने का राशन एक साथ देने का निर्देश दिया गया, किंतु इसका दुरुपयोग कर चावल की खुलेआम कालाबाजारी हो रही है।
वनांचल में सबसे ज्यादा सक्रिय हैं बिचौलिए
कवर्धा जिले के वनांचल ग्रामों – रेंगाखार, झलमला, चिल्फी, समनापुर, बोककरखर, दलदली, नेउर सहित दर्जनों गांवों में राशन दुकानदार सीलपैक चावल की बोरियां सीधे किराना दुकानों को बेच रहे हैं। इन गांवों में कई दुकानों के सामने बिचौलिए खुलेआम हितग्राहियों से 20-25 रुपए प्रति किलो में चावल खरीदते देखे गए हैं। इसके बाद वही चावल किराना दुकानों में 30-35 रुपए प्रति किलो तक बेचा जा रहा है।
मिलती है नकद राशि
सूत्रों के अनुसार राशन दुकानदार हितग्राहियों से अंगूठा लगवाकर चावल की जगह नकद राशि दे रहे हैं, जबकि यह प्रक्रिया पूरी तरह अवैध और दंडनीय है। इस अनौपचारिक सहमति से दुकानदार चावल को बिचौलियों को ऊंचे दामों में बेचते हैं और योजना की मूल भावना को तार-तार कर रहे हैं।
प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय
अब तक वनांचल सहित जिले के किसी भी क्षेत्र में प्रशासन द्वारा कोई छापामार कार्रवाई नहीं की गई है। इसके चलते दुकानदार और बिचौलिए पूरी बेखौफी से इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। कई गांवों में बाइक पर रोज तीन-चार खेपों में चावल ढोया जा रहा है, लेकिन निगरानी और नियंत्रण कहीं नजर नहीं आता।
संगठित नेटवर्क बना पीडीएस चावल का कारोबार
यह भी सामने आया है कि कुछ मिलर्स इन कालाबाजारी वाले चावलों को पुनः पैकेज कर सरकारी लॉट नंबर के साथ उचित मूल्य की दुकानों में पुनः भेज रहे हैं। यह प्रक्रिया आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के अंतर्गत गंभीर अपराध है, जिसमें अधिकतम सात साल तक की सजा का प्रावधान है।
जनता के अधिकार का चावल, बिचौलियों की कमाई का माध्यम बन रहा है और पीडीएस की साख दांव पर लगी हुई है। शासन को तत्काल संज्ञान लेकर वनांचल क्षेत्रों में विशेष निगरानी दल तैनात कर छापामारी अभियान चलाना चाहिए, ताकि गरीबों का हक सुरक्षित रह सके।