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सेवानिवृत्त वनपाल पर लाखो के भ्रष्टाचार का आरोप, परिजन के खातों में डलवाया शासकीय धन – कार्रवाई में देरी पर उठे सवाल

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भोरमदेव अभ्यारण्य के अंतर्गत जामुनपानी सर्किल में पदस्थ रहे वनपाल हनुमान दास मानिकपुरी पर करोड़ों रुपये के शासकीय धन का गबन कर परिजनों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराने का गंभीर आरोप सामने आया है। शिकायतकर्ता ने 14 मई 2025 को कलेक्टर कबीरधाम और वनमंडलाधिकारी को आवेदन देकर मामले की शिकायत की थी, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की गई।कवर्धा के जामुनपानी सर्किल में पदस्थ रहे हनुमान दास मानिकपुरी पर आदिवासी हितग्राहियों का पैसा बेटे-बहू के खातों में ट्रांसफर कराने का गंभीर आरोप, वन मंत्री और पीसीसीएफ को भी भेजी गई शिकायत पत्र ।
विवाद का मुख्य बिंदु यह है कि जिन आदिवासी हितग्राहियों को शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत भुगतान किया जाना था, उनका पैसा वनपाल ने कथित रूप से अपने बेटे महेशदास (खाता नंबर: ××××××××8433, बैंक ऑफ बड़ौदा, उड़िया शाखा) और बहू सरस्वती बाई (खाता नंबर: ××××××××8431, वही शाखा) के खातों में ट्रांसफर कराया। आरोप है कि लाखों रुपये की यह राशि नियमों को दरकिनार कर गबन की गई है।
सूत्रों के अनुसार, शिकायत पत्र के साथ बैंक खातों का स्टेटमेंट भी संलग्न किया गया है, जिससे भुगतान की जानकारी की पुष्टि होती है। बावजूद इसके, न तो कलेक्टर कार्यालय और न ही वन विभाग ने तत्काल कोई कठोर कदम उठाया।
इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता ने 28 मई को वन मंत्री तथा छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) को भी लिखित शिकायत दी। फिर भी विभागीय जांच की रफ्तार बेहद धीमी बनी रही।
जानकारी के अनुसार, आरोपित वनपाल और परिक्षेत्र अधिकारी दोनों मई माह में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इससे पहले जांच पूरी नहीं हो पाना भी विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। हाल ही में डीएफओ निखिल अग्रवाल ने जांच अधिकारी के रूप में अनिल कुमार साहू (उपवनमंडलाधिकारी, सहसपुर लोहारा) को नियुक्त किया है, जिन्होंने कथित तौर पर संबंधितों के बयान दर्ज कर लिए हैं और 25 जून तक रिपोर्ट सौंपने की बात कही है।
विलंबित जांच पर खड़े हुए सवाल
एक ओर जहां शासन द्वारा भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे गंभीर मामले में महीनों तक कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं किया जाना चिंता का विषय है। अब जबकि आरोपी अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, शासन को इस मामले में तत्परता दिखानी चाहिए थी।
शिकायतकर्ता की मांग
शिकायतकर्ता का स्पष्ट कहना है कि शासकीय धन की वसूली तत्काल की जाए और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। शिकायत से जुड़े दस्तावेजों एवं बैंक स्टेटमेंट की प्रति शिकायत पत्र के साथ संलग्न की गई है।

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