स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायतों को कचरा मुक्त बनाने और साफ-सफाई व्यवस्था सुधारने की महत्वाकांक्षी योजना महज दिखावे तक सीमित रह गई है। इसकी बानगी कबीरधाम जिले के ग्राम पंचायत जामुनपानी, जनपद पंचायत बोड़ला में देखने को मिल रही है, जहां कचरा संग्रहण केंद्र का भवन निर्माण के महज एक साल के भीतर ही जर्जर हो गया है। भवन की छत उखड़ चुकी है, दीवारें दरकने लगी हैं और दरवाजे-खिड़कियां जंग खा रही हैं।
स्वच्छता की योजना, लेकिन लापरवाही का निर्माण
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना का उद्देश्य गांवों को साफ-सुथरा और कचरा मुक्त बनाना है। इसके तहत हर पंचायत में कचरा संग्रहण केंद्र निमार्ण कर रिक्शा की खरीदी किया गया है । इन केंद्रों में गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र कर उचित निस्तारण करना था, लेकिन जामुनपानी पंचायत में इसका हाल देखकर योजना की सफलता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। लगभग साढ़े तीन लाख की योजना के तहत बना यह भवन उपयोग में आने से पहले ही खंडहर में तब्दील हो चुका है।
नियमों को दरकिनार कर बनाया गया भवन
स्वीकृत मापदंडों और तकनीकी शर्तों के अनुसार निर्माण सामग्री और संरचना की गुणवत्ता सुनिश्चित करना था, लेकिन निर्माण कार्य में घोर अनियमितता बरती गई है। घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण भवन आज जर्जर हाल में खड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार निर्माण के समय शिकायतें की गई थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने अनदेखी कर निर्माण पूरा करा दिया।
जिम्मेदार मौन, ग्रामीणों में आक्रोश
ग्रामवासियों ने पंचायत सचिव, जनपद पंचायत बोड़ला, और स्वच्छ भारत मिशन के जिम्मेदार अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य के लिए निर्माण एजेंसी के साथ-साथ अधिकारियों की मिलीभगत जिम्मेदार है। कचरा प्रबंधन केंद्र के बेकार होने से पंचायत में कचरा प्रबंधन व्यवस्था ठप है।
ग्रामीणों ने की जांच और कार्रवाई की मांग
ग्राम पंचायत जामुनपानी के नागरिकों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर इसी तरह योजनाओं का कागजी क्रियान्वयन चलता रहा तो स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य कभी भी पूरा नहीं हो पाएगा।
स्वच्छ भारत मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना को सफल बनाने के लिए जिम्मेदारों पर जवाबदेही तय करते हुए गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य की निगरानी आवश्यक है। अन्यथा करोड़ों की सरकारी राशि का यूं ही दुरुपयोग होता रहेगा और गांवों को स्वच्छ बनाने का सपना अधूरा रह जाएगा।