कवर्धा। एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में कई योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर कबीरधाम जिले का बेहद संभावनाशील पर्यटक स्थल सरोदा दादर बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण उपेक्षा का शिकार होता जा रहा है। चिल्फी पंचायत अंतर्गत आने वाला यह इलाका जहां प्रकृति की अद्भुत छटा और विश्वप्रसिद्ध बैगा जनजाति की संस्कृति का जीवंत केंद्र है, वहीं इसकी पहुंच अब तक बेहद कठिन और दुर्गम बनी हुई है।
प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता का अद्वितीय संगम
सरोदा दादर में स्थित जोहार एथनिक रिसॉर्ट छत्तीसगढ़ के सबसे प्रमुख ट्राइबल रिसॉर्ट्स में गिना जाता है। यहाँ पर्यटक न केवल घने जंगलों, ऊंचे पहाड़ों और ठंडी जलवायु का आनंद लेने आते हैं, बल्कि यहां की बैगा जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली, रीति-रिवाज और कला-संस्कृति को भी करीब से देखने का अवसर पाते हैं। विदेशी पर्यटकों के लिए भी यह स्थल काफी आकर्षण का केंद्र रहा है।
‘स्वदेश दर्शन योजना’ के अंतर्गत विकसित इस क्षेत्र को पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार (GOI-MOT) द्वारा विशेष पहचान दी गई है। बावजूद इसके, चिल्फी से सरोदा दादर तक की सड़कें आज भी पूरी तरह से खस्ताहाल हैं।
सड़कें बनीं विकास में सबसे बड़ी बाधा
पर्यटकों और स्थानीय ग्रामीणों को हर दिन गड्ढों से भरी, उबड़-खाबड़ और संकरी सड़क से गुजरना पड़ता है। बारिश के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। कई बार पर्यटक आधे रास्ते से ही वापस लौट जाते हैं, जिससे क्षेत्र की पर्यटन संभावनाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार ज्ञापन देने और शिकायतों के बावजूद अब तक न तो स्थायी सड़क निर्माण हुआ और न ही कोई व्यापक मरम्मत कार्य। क्षेत्रवासी और पर्यटन व्यवसायी अब सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं।
पर्यटन को लग सकती है उड़ान
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चिल्फी-सरोदा दादर मार्ग को पक्की और सुलभ सड़क से जोड़ा जाए तो यह क्षेत्र न केवल पर्यटकों के लिए सुलभ होगा, बल्कि बैगा जनजाति की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय रोजगार को भी नया जीवन मिलेगा।
यह इलाका ‘ईको-टूरिज्म’ और ‘एथनिक टूरिज्म’ दोनों के लिए उपयुक्त है। रिसॉर्ट संचालकों का कहना है कि सड़कें सुधर जाएं तो राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार के साथ इसे छत्तीसगढ़ का अंतरराष्ट्रीय ट्राइबल टूरिज्म मॉडल बनाया जा सकता है।
जरूरत है समन्वित प्रयास की
राज्य शासन, पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन को मिलकर इस क्षेत्र के संपूर्ण विकास के लिए पहल करनी होगी। सड़क, परिवहन, संचार और मूलभूत सुविधाओं के साथ यदि बैगा संस्कृति को वैश्विक मंच दिया जाए तो सरोदा दादर आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की पहचान बन सकता है।