बोड़ला। वानंचल ग्राम बैरख में स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही उजागर हुई है। इन दिनों पूरे क्षेत्र में वायरल फीवर का कहर फैला हुआ है, लेकिन आदिवासी बहुल गांव बैरख का उपस्वास्थ्य केंद्र शुक्रवार को बंद पड़ा था । इलाज की उम्मीद में पहुंचे ग्रामीणों को ताला लटका मिला, जिससे मरीजों को भारी निराशा हाथ लगी।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार करोड़ों की योजनाओं और आयुष्मान भारत, आरोग्य मंदिर जैसे नारों का खूब प्रचार करती है, लेकिन जब असली वक्त आता है तो दवा और डॉक्टर दोनों नदारद मिलते हैं। मजबूर होकर लोग निजी दवाखानों का सहारा ले रहे हैं और महंगे इलाज के लिए कर्ज तक लेना पड़ रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्र में पदस्थ महिला स्वास्थ्यकर्मी मातृत्व अवकाश पर हैं, जबकि दूसरा कर्मचारी निजी काम से बेमेतरा गया हुआ है।
हड़ताल से और बिगड़ी स्थिति
इधर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत अधिकारी-कर्मचारी और मितानिन भी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इस वजह से जिले के अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। बैरख जैसे आदिवासी इलाकों में इसका असर सबसे ज्यादा दिख रहा है।
ग्रामीणों के सवाल
जब वायरल फीवर गांव-गांव फैल रहा है तो स्वास्थ्यकर्मी कहां हैं ।
आदिवासी समुदाय के लिए बने स्वास्थ्य केंद्र पर तालाबंदी कौन करेगा खत्म ।
प्रशासन आखिर कब तक आंखें मूंदे बैठेगा ।
ये हालात साबित करते हैं कि सरकार की योजनाएं और दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं, जबकि बीमार जनता अब भी बुनियादी इलाज के लिए भटक रही है।