वन प्रबंधन और आजीविका आधारित नवाचारों के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ लगातार उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। इसी कड़ी में ओडिशा फॉरेस्ट रेंजर्स कॉलेज, अंगुल के 40 प्रशिक्षु अधिकारी आज वनमंडल कवर्धा के अध्ययन भ्रमण पर पहुंचे, जहां उन्होंने बोड़ला स्थित शहद प्रसंस्करण केंद्र का अवलोकन किया।
डीसीएफ अमूल्य कुमार परिडा के नेतृत्व में पहुंचे प्रशिक्षुओं को वनमंडलाधिकारी श्री निखिल अग्रवाल, उपवनमंडलाधिकारी श्री अभिनव केसरवानी तथा वन परिक्षेत्राधिकारी श्री आकाश यादव, श्री गजेंद्र कुमार और श्री विक्रांत सिंह कंवर ने शहद प्रसंस्करण की तकनीकी प्रक्रिया, उत्पादन से विपणन तक की श्रृंखला और वन्यजीव गलियारे (Wildlife Corridor) की अवधारणा पर विस्तृत जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि शहद प्रसंस्करण केंद्र जैसे उपक्रम स्थानीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के संवर्धन में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। यह मॉडल सतत वन प्रबंधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है।
प्रशिक्षुओं ने केंद्र की कार्यप्रणाली और स्थानीय वन उत्पादों के मूल्य संवर्धन को सराहते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के ये प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से प्रेरणादायक हैं, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करते हैं।