कवर्धा , जिले में जिला खनिज न्यास निधि के तहत स्वीकृत निर्माण कार्यों की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला बोड़ला विकासखण्ड के ग्राम गण्डई खुर्द का है, जहाँ हनुमान मंदिर के पास पुलिया निर्माण कार्य को लेकर सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं।
सूचना पटल के अनुसार यह पुलिया निर्माण कार्य जिला खनिज न्यास निधि, स्वीवर्ष 2025-26 के अंतर्गत स्वीकृत किया गया था। कार्य एजेंसी ग्राम पंचायत गण्डई खुर्द रही और कुल 7.11 लाख रुपये की राशि इस निर्माण पर खर्च की गई। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि यह निर्माण बरसात के मौसम में मात्र 37 दिनों के भीतर पूरा कर दिया गया।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार जिस स्थान पर यह पुलिया बनाई गई है, वह फोक नदी का किनारा है, जहाँ पुलिया निर्माण की वास्तविक आवश्यकता नहीं थी। नदी पार करने के लिए पहले से ही एक बड़ा पुल मौजूद है, वहीं नदी किनारे कुछ दूरी पर एक अन्य पुलिया भी बनी हुई है। ऐसे में नई पुलिया का निर्माण जिला खनिज न्यास निधि के उद्देश्यों और नियमों के विपरीत माना जा रहा है।
जिला खनिज न्यास निधि अधिनियम व दिशा-निर्देशों के अनुसार खनन प्रभावित क्षेत्रों में उन्हीं कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जो वास्तविक, आवश्यक और जनहित से जुड़े हों। लेकिन यहाँ अनावश्यक स्थान पर निर्माण, बरसात में जल्दबाजी, और मौजूद संरचनाओं की अनदेखी जैसे तथ्य गंभीर अनियमितता की ओर इशारा करते हैं।
स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि बरसात में किया गया निर्माण भविष्य में क्षतिग्रस्त हो सकता है, जिससे एक बार फिर सरकारी राशि की बर्बादी तय मानी जा रही है। यह स्थिति जिला खनिज न्यास निधि के मूल उद्देश्य—खनन से प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास—पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
गौरतलब है कि बोड़ला विकासखण्ड में जिला खनिज न्यास निधि मद से लगभग 13 करोड़ रुपये से अधिक के निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। यदि इन कार्यों की सूक्ष्म तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय जांच कराई जाए, तो व्यापक अनियमितताओं के उजागर होने की पूरी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सवाल यह उठता है कि—
बिना आवश्यकता के पुलिया निर्माण को स्वीकृति किस आधार पर दी गई।
क्या स्थल निरीक्षण और जन-आवश्यकता का वास्तविक आकलन किया गया।
क्या जिला खनिज न्यास निधि के नियमों का पालन हुआ।
प्रशासन और जिला खनिज न्यास प्रबंधन से इस पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई, और निधि के दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग तेज होती जा रही है।