सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित उचित मूल्य की दुकानों से जुड़ा एक बड़ा घोटाला कवर्धा जिले में उजागर हुआ है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों— सहसपुर लोहारा, रेंगाखार, बोड़ला, कवर्धा, पिपरिया, कुकदुर, कुंडा और पंडरिया — में संचालित लगभग तीन दर्जन दुकानदारों और संचालन एजेंसियों पर करीब दो करोड़ रुपए मूल्य की सरकारी खाद्य सामग्री (चावल, शक्कर, नमक और चना) के गबन का आरोप लगा है।
सितंबर 2022 में खाद्य विभाग द्वारा कराए गए भौतिक सत्यापन में लगभग 34 हजार क्विंटल खाद्य सामग्री की कमी पाई गई थी। जांच के बाद 29 हजार क्विंटल की वसूली की जा चुकी है, किंतु अब भी 4,800 क्विंटल खाद्य सामग्री का हिसाब बाकी है।
खाद्य विभाग ने बकाया वसूली के लिए सभी संबंधित दुकानदारों के विरुद्ध राजस्व वसूली प्रमाण पत्र (RRC) जारी कर तहसीलदारों को कार्रवाई के लिए भेजा है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर वसूली की प्रक्रिया बेहद धीमी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, तहसील स्तर पर कार्रवाई में सुस्ती और प्रभावशाली लोगों के दबाव दोनों झलक रहे हैं।
जिला खाद्य अधिकारी सचिन मरकाम ने बताया कि अब तक तीन दुकानदारों पर एफआईआर दर्ज, पांच को निलंबित, और आठ दुकानों का अनुज्ञापन निरस्त किया गया है, जबकि अन्य स्थानों पर वसूली की कार्रवाई जारी है।
मामला आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आता है, क्योंकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से मिलने वाला अनाज और खाद्य सामग्री सीधे गरीब और जरूरतमंद परिवारों के हक से जुड़ी है। ऐसे में यह गबन न केवल प्रशासनिक विफलता बल्कि जनहित से विश्वासघात भी माना जा रहा है।