कवर्धा। अंत्यावसायी विकास विभाग कवर्धा के प्रभारी कार्यपालन अधिकारी रहे दीपक नामदेव को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया है। यह मामला वर्ष 2019 का है, जब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बैगा युवक कामू बैंगा से बीस हजार रुपए रिश्वत मांगने के आरोप में उनके कार्यालय में छापा मारा था।
17 जनवरी 2019 को हुई इस कार्यवाही के बाद निचली अदालत ने दीपक नामदेव को दोषी ठहराया था, जिसे उन्होंने अपने अधिवक्ता गौतम खेत्रपाल के माध्यम से उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
मुख्य न्यायाधीश की सिंगल बेंच ने 13 अक्टूबर 2025 को आए निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष यह सिद्ध करने में असफल रहा कि नामदेव ने किसी प्रकार की अवैध मांग या रिश्वत की वसूली की थी।
अधिवक्ता गौतम खेत्रपाल ने दलील दी कि शिकायतकर्ता को ऋण की पूरी राशि पहले ही जारी हो चुकी थी, अतः रिश्वत मांगने का कोई औचित्य ही नहीं था। अदालत ने माना कि मांग के ठोस सबूत के बिना भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13 के तहत अपराध सिद्ध नहीं किया जा सकता।
रक्षा पक्ष ने यह भी बताया कि कामू बैंगा को पहली किस्त मिलने के बाद वह कार्य नहीं कर रहा था, इसलिए उसे दो बार नोटिस दिया गया और बाद में वसूली का अंतिम नोटिस जारी किया गया था। इसी के बाद उसने झूठी शिकायत दर्ज कराई थी।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि निचली अदालत द्वारा पारित निर्णय त्रुटिपूर्ण था और उसे निरस्त करते हुए दीपक नामदेव को सभी आरोपों से बरी किया जाता है।
दिनांक 05 जुलाई 2023 को पारित दोषसिद्धि आदेश को रद्द करते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि “अवैध परितोषण की मांग का अभाव” इस मामले में अभियोजन की विफलता का मुख्य कारण रहा।
न्यायालय का यह फैसला विभागीय अधिकारियों के लिए एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।