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पहले दिन धान खरीदी ठप… सोसायटियों में ताले, किसान लौटे बैरंग — सरकार किसानों का पूरा धान खरीदना ही नहीं चाहती : इंद्र साव

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 धान खरीदी के पहले ही दिन प्रदेश सरकार की तैयारियों की पोल खुल गई। क्षेत्र की कई सोसायटियों में खरीदी की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से किसान अपनी उपज लेकर बैरंग लौटने को मजबूर हुए। शनिवार को धान खरीदी केंद्रों के निरीक्षण के बाद विधायक इंद्र साव ने बताया कि सरकार की किसान-विरोधी नीतियों के कारण यह स्थिति बनी है।
विधायक इंद्र साव ने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले ही 15 दिन देर से धान खरीदी शुरू करने का ऐलान किया, और जिस दिन खरीदी शुरू होनी थी उसी दिन बड़ी संख्या में किसानों को खड़ी सोसायटियों में ताला मिला। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि किसानों का पूरा धान खरीदा जाए, इसलिए केवल 21 क्विंटल प्रति एकड़ खरीदने का फरमान जारी कर किसानों के साथ धोखा किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस बार धान खरीदी प्रक्रिया किसानों के लिए ‘लेंदी’ साबित हो रही है। टोकन व्यवस्था के चलते किसान अपनी पूरी फसल बेचने में असमर्थ हैं और मजबूरी में बची हुई फसल बिचौलियों को बेचनी पड़ रही है, जिससे समय और आर्थिक नुकसान दोनों हो रहा है।
तैयारियों में भारी लापरवाही
विधायक साव ने उपार्जन केंद्रों के निरीक्षण में पाया कि किसानों के बैठने की व्यवस्था तक नहीं है और ना ही पीने के पानी का प्रबंध। उन्होंने सरकारी दावों को पूरी तरह असफल बताते हुए कहा कि वे नियमित रूप से उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण कर किसानों की फसल, तौल और भुगतान की स्थिति पर निगरानी रखेंगे तथा किसी भी हाल में किसानों की उपज बिचौलियों के हाथों नहीं जाने देंगे।
इन सोसायटियों में पहले दिन धान खरीदी नहीं हुई:
लेवई, बिटकुली, धनेली, खैरा, पाटन, निपनिया, केशला, करहीबाज़ार, मोपका, बनसांकरा, दामाखेड़ा, विश्रामपुर, मर्राकोना, कामता, चंदेरी, ।

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