वन्यप्राणियों की सुरक्षा और अवैध शिकार पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ के दुर्ग वन वृत्त में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई है। इसी क्रम में “एंटी स्नेयर वॉक फॉर कॉम्बेटिंग वाईल्डलाइफ क्राइम” विषय पर वृत्त स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन आज काष्ठागार सभागार, कवर्धा में किया गया। यह कार्यशाला वन्यप्राणी संरक्षण की दिशा में एक निर्णायक और दूरगामी कदम के रूप में देखी जा रही है। कार्यशाला का आयोजन मुख्य वन संरक्षक दुर्ग वृत्त श्रीमती एम. मर्सीबेला के मार्गदर्शन में तथा वनमंडलाधिकारी कवर्धा श्री निखिल अग्रवाल की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) छत्तीसगढ़, रायपुर श्री माथेश्वरन व्ही मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
वन बीट को सशक्त बनाने पर जोर मुख्य अतिथि श्री माथेश्वरन व्ही ने अपने संबोधन में कहा कि वन्यप्राणी अपराधों को रोकने के लिए प्रत्येक वन बीट को मजबूत और सतर्क बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने क्षेत्रीय अधिकारियों को अपने मुख्यालय में निवास करने, नियमित गश्त बढ़ाने, संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने तथा सूचना तंत्र को मजबूत करने के स्पष्ट निर्देश दिए। उनका कहना था कि घटना के बाद कार्रवाई से बेहतर है, घटना से पहले रोकथाम। एंटी स्नेयर वॉक की व्यवहारिक जानकारी कार्यशाला में नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी, रायपुर के श्री एम. सूरज एवं श्री सिद्धांत जैन द्वारा पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से एंटी स्नेयर वॉक की विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें शिकारियों द्वारा लगाए जाने वाले फांदों (स्नेयर) के प्रकार, उनकी कार्यप्रणाली और उन्हें पहचानकर निष्क्रिय करने की व्यवहारिक विधि को सरल भाषा में समझाया गया।
बताया गया कि एंटी स्नेयर वॉक का मुख्य उद्देश्य वन क्षेत्रों को फांदा-मुक्त बनाना है। इस कार्यशाला में दुर्ग वृत्त के समस्त अधिकारी-कर्मचारियों ने मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त किया, ताकि वे अपने-अपने वन क्षेत्रों में इस अभियान को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें। आज की कार्यशाला के साथ ही इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया गया। विभागीय समन्वय से मिलेगी मजबूती कार्यक्रम में सीएसईबी कबीरधाम के कार्यपालन अभियंता श्री गुरुदयाल सिंह फ्लोरा ने वन क्षेत्रों से गुजरने वाली विद्युत लाइनों में अवैध हुकिंग की समस्या और उसके समाधान पर प्रकाश डाला। उन्होंने वन विभाग और विद्युत विभाग के बीच संयुक्त बैठक एवं व्हाट्सएप समूह के माध्यम से समन्वय स्थापित करने का सुझाव दिया, जिससे वन्यप्राणियों की मृत्यु जैसी घटनाओं को रोका जा सके। वहीं साइबर सेल कवर्धा के सहायक उप निरीक्षक श्री चंद्रकांत तिवारी ने मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के माध्यम से अपराधियों की पहचान की प्रक्रिया की जानकारी दी। अधिवक्ता श्री निमिष कुमार शर्मा ने अवैध शिकार से जुड़े विधिक प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए सख्त कानूनों की जानकारी साझा की। सामूहिक प्रयास से मिलेगा ठोस परिणाम कार्यक्रम के समापन पर वनमंडलाधिकारी कवर्धा श्री निखिल अग्रवाल ने कहा कि वन विभाग, पुलिस, विद्युत विभाग, सामाजिक संगठनों और विधिक विशेषज्ञों के आपसी समन्वय से एंटी स्नेयर वॉक अभियान को सफल बनाया जा सकता है। इससे वन्यप्राणियों की सुरक्षा को स्थानीय से लेकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक मजबूती मिलेगी। कार्यशाला में दुर्ग वृत्त के अंतर्गत सभी वनमंडलों के उप वनमंडलाधिकारी, परिक्षेत्र अधिकारी, कवर्धा वनमंडल के समस्त अधिकारी-कर्मचारी तथा स्थानीय पत्रकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यशाला न केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम रही, बल्कि छत्तीसगढ़ में वन्यप्राणी संरक्षण को नई दिशा देने वाला राष्ट्रीय महत्व का अभियान साबित होने की ओर अग्रसर है।