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फोरेंसिक जांच में खुलासा : मूर्तियां तोड़फोड़ नहीं, घटिया निर्माण की शिकार लाखों की प्रतिमाएं दरारों के सहारे, सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका गहराई

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जिला मुख्यालय में स्वतंत्रता संग्राम और छत्तीसगढ़ की संस्कृति को दर्शाने के नाम पर नगर में स्थापित की गई लाखों रुपए की प्रतिमाएं अब भ्रष्टाचार की मिसाल बनती नजर आ रही हैं। मूर्तियों में कथित तोड़फोड़ की सूचना के बाद कराई गई फोरेंसिक जांच ने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी है।
पुलिस व फोरेंसिक टीम की विधिवत जांच में प्रथम दृष्टया यह तथ्य सामने आया है कि मूर्तियों का निर्माण अत्यंत निम्न गुणवत्ता का किया गया, जिनमें पहले से ही गहरी दरारें मौजूद थीं। 
जांच के अनुसार मूर्तियों का टूटकर गिरना किसी साजिश या तोड़फोड़ से अधिक घटिया निर्माण और लापरवाही का परिणाम प्रतीत हो रहा है।
उक्त मामले में नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा दर्ज कराई गई सूचना पर थाना सिटी कोतवाली पुलिस एवं फोरेंसिक अधिकारी राजीव पंकज द्वारा स्थल परीक्षण किया गया। जांच के निष्कर्षों ने सरकारी धन के दुरुपयोग की गंभीर आशंका को जन्म दे दिया है।
पुलिस विभाग ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) को मूर्तियों की तकनीकी और गुणवत्ता संबंधी विस्तृत जांच के लिए पत्र जारी किया है। साथ ही, मूर्तियों का निर्माण करने वाली एजेंसी/ठेकेदार का नाम स्पष्ट करने हेतु भी पुलिस द्वारा पत्राचार किया गया है, ताकि जिम्मेदारों की पहचान हो सके।
सूत्रों के अनुसार, लोक निर्माण विभाग से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर न केवल निर्माण एजेंसी बल्कि गुणवत्ता का मूल्यांकन कर राशि भुगतान करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी दंडात्मक कार्रवाई की मांग उठ रही है। यदि जांच में लापरवाही या मिलीभगत पाई जाती है, तो यह मामला केवल निर्माण एजेंसी तक सीमित नहीं रहेगा।
इसके अतिरिक्त, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुलिस द्वारा नगर में स्थापित प्रतिमाओं की 24 घंटे निगरानी हेतु उच्च गुणवत्ता के सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनका फीड जिला कंट्रोल रूम से जोड़ने के लिए नगर पालिका परिषद बलौदाबाजार को निर्देशित किया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
लाखों रुपए की लागत से बनी प्रतिमाओं में निर्माण के समय गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं हुई।
बिना सत्यापन के भुगतान किसके आदेश पर किया गया।
फोरेंसिक जांच ने जहां तोड़फोड़ की थ्योरी को कमजोर किया है, वहीं नगर में हुए संभावित भ्रष्टाचार की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं। आने वाले दिनों में लोक निर्माण की रिपोर्ट और ठेकेदार का नाम सामने आने के बाद यह मामला और भी बड़ा रूप ले सकता है।

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