एकीकृत बाल विकास परियोजना, बोड़ला के अंतर्गत सेक्टर महाराजपुर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र खैरबना कला–2 में बच्चों के सर्वांगीण विकास को केंद्र में रखते हुए सुव्यवस्थित और उद्देश्यपूर्ण दिनचर्या का सफल संचालन किया गया। केंद्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और संस्कार—चारों आयामों को संतुलित रूप से समाहित कर सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया गया।
प्रातः 9:30 बजे केंद्र खुलते ही सहायिका द्वारा साफ-सफाई कर स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित किया गया। इसके पश्चात बच्चों को आमंत्रित कर 10:00 बजे उपस्थिति ली गई। 10:00 से 10:45 बजे तक बच्चों ने मुक्त खेल गतिविधियों में भाग लिया, जिससे उनकी शारीरिक सक्रियता, आपसी समन्वय और आत्मविश्वास को बढ़ावा मिला।
इसके बाद बच्चों को स्वागत, नाम व पहचान गतिविधि के अंतर्गत अपनी आईडी पहचानकर पहनने की प्रक्रिया कराई गई, जिससे उनमें आत्मपहचान और अनुशासन की भावना विकसित हुई। इसके उपरांत बच्चों को पौष्टिक नाश्ता प्रदान किया गया। नाश्ते के बाद प्रार्थना, हाथों से छापा लगाना, बाल गीत जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के बौद्धिक, भाषायी और रचनात्मक कौशल को प्रोत्साहित किया गया।
दोपहर 1:00 बजे बच्चों को पौष्टिक भोजन कराया गया, जिससे उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुदृढ़ किया गया। वहीं 2:00 बजे कहानी सत्र आयोजित किया गया, जिसके माध्यम से नैतिक मूल्यों, कल्पनाशक्ति और सुनने-समझने की क्षमता का विकास किया गया।
इस केंद्र की गतिविधियों का संचालन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भगवती साहू एवं सहायिका बेदबाई यादव द्वारा समर्पण और जिम्मेदारी के साथ किया गया। यह प्रयास स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण का ही नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार और सर्वांगीण बाल विकास का मजबूत आधार बनते जा रहे हैं।
खैरबना कला–2 का यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा की भावना को साकार करता हुआ एक प्रेरणादायी उदाहरण है।