विकासखंड पलारी के ग्राम पंचायत मुड़पार (संडी) में पंचायत राज व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। हालिया जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि काम्प्लेक्स किराया और बाजार नीलामी से प्राप्त कुल 4 लाख 72 हजार रुपये की सरकारी राशि पंचायत खाते से गायब है। यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितता, बल्कि शासकीय धन के दुरुपयोग और गबन की श्रेणी में आता है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार पंचायत आय के प्रमुख स्रोत —
काम्प्लेक्स दुकानों का मासिक किराया
वर्ष 2025-26 की बाजार नीलामी की राशि
को न तो पंचायत के अधिकृत खाते में जमा किया गया और न ही छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ग्राम सभा के समक्ष आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत किया गया।
सरपंच पर सीधा आरोप
जांच में ग्राम पंचायत की वर्तमान सरपंच टामिन साहू पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने जानबूझकर काम्प्लेक्स किराया और बाजार नीलामी की राशि को पंचायत खाते में जमा न कर निजी उपयोग में लिया। यह कृत्य पंचायत राज अधिनियम, 1993, छत्तीसगढ़ पंचायत (वित्तीय एवं लेखा) नियम, तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत दंडनीय अपराध माना जा रहा है।
शिकायत में चौंकाने वाले तथ्य
शिकायतकर्ताओं ने जिला पंचायत बलौदाबाजार-भाटापारा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को दी गई लिखित शिकायत में बताया कि —
ग्राम संडी मुड़पार में निर्मित 12 दुकानों से प्रति माह 25 हजार रुपये किराया वसूला जा रहा था।
पिछले 8 महीनों में लगभग 1.50 लाख रुपये की वसूली हुई,
लेकिन न तो रसीद काटी गई और न ही राशि पंचायत खाते में जमा की गई।
इसके अलावा वर्ष 2025-26 की बाजार नीलामी से प्राप्त 3 लाख 22 हजार रुपये भी पूरी तरह गायब हैं।
जांच अधिकारी का बयान
जांच अधिकारी मनहरण वर्मा ने स्पष्ट किया—
“पंचायत में भारी वित्तीय गड़बड़ी पाई गई है। सोमवार को जांच प्रतिवेदन तैयार कर सीईओ को सौंपा जाएगा।”
प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी
मामला सामने आने के बाद पंचायत और जिला प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो सरपंच के विरुद्ध —
रिकवरी,
निलंबन/पद से हटाने,
एफआईआर दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई
जैसे कठोर कदम तय माने जा रहे हैं।
सवालों के घेरे में पंचायत व्यवस्था
यह मामला एक बार फिर सवाल खड़े करता है कि ग्रामीण विकास के नाम पर आने वाली सरकारी राशि आखिर किसकी जेब भर रही है? पंचायत राज व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करने वाला सिस्टम, खुद भ्रष्टाचार के दलदल में फंसता नजर आ रहा है।