कवर्धा वन मंडल के प्रशासनिक कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वन मंडल अंतर्गत पदस्थ फॉरेस्ट गार्ड ललित यादव की सड़क दुर्घटना में हुई दर्दनाक मौत अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बनती जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, ललित यादव की मौत दुर्ग से करीब 10 किलोमीटर पहले एक सड़क हादसे में हो गई। दुर्घटना की परिस्थितियां अब तक स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन इससे पहले जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने पूरे वन विभाग को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।
निलंबित कर्मचारी से कराया गया सरकारी काम!
गौरतलब है कि फॉरेस्ट गार्ड ललित यादव को हाल ही में बायसन प्रकरण में निलंबित किया गया था। निलंबन की स्थिति में किसी भी कर्मचारी से कार्यालयीन कार्य कराना नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
इसके बावजूद, उन्हें स्वयं निलंबन से संबंधित सरकारी दस्तावेज लेकर सीसीएफ कार्यालय, दुर्ग भेजा गया—और इसी दौरान उनकी जान चली गई।
उठते हैं गंभीर सवाल
जब कर्मचारी निलंबित था, तो उसे विभागीय दस्तावेज लेकर क्यों भेजा गया।
क्या वन मंडल अधिकारी ने नियमों को ताक पर रखा ।
क्या यह सीधी-सीधी प्रशासनिक लापरवाही नहीं है।
यदि दस्तावेज भेजने थे, तो विभागीय माध्यम या डाक व्यवस्था का उपयोग क्यों नहीं किया गया।
इस मौत की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी आखिर किसकी है ।
उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज
इस मामले को लेकर अब उच्च स्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ रही है। कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में ऐसे ही और कर्मचारी सिस्टम की भेंट चढ़ते रहेंगे।
मांग की जा रही है कि वन मंडल के जिम्मेदार अधिकारी सहित संबंधित की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
परिवार में कोहराम, विभाग में आक्रोश
ललित यादव की असमय मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहीं, वन विभाग के कर्मचारियों में शोक के साथ-साथ गुस्सा और असंतोष भी गहराता जा रहा है।
यह सवाल अब सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का बन चुका है।