जिले में ग्रामीण रोजगार और आवास को लेकर एक सकारात्मक और सशक्त पहल सामने आई है। रोजगार एवं आवास दिवस के अवसर पर जिले के 55 हजार 599 से अधिक ग्रामीणों को उनके रोजगार के अधिकार सुरक्षित होने, समय पर मजदूरी भुगतान तथा ग्रामीण अधोसंरचना विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। यह आयोजन विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण के अंतर्गत जिले की ग्राम पंचायतों में व्यापक स्तर पर संपन्न हुआ।

जिले की वनांचल से लेकर मैदानी ग्राम पंचायतों तक आयोजित कार्यक्रमों में ग्रामीणों को बताया गया कि 1 अप्रैल 2026 से प्रत्येक पंजीकृत परिवार को 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार मिलेगा। साथ ही मजदूरी का भुगतान एक सप्ताह के भीतर, अधिकतम 15 दिनों में सुनिश्चित होगा। समय पर भुगतान नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते का भी प्रावधान किया गया है।
रोजगार दिवस के दौरान ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीणों को यह भी अवगत कराया गया कि पंचायत स्तर पर होने वाले निर्माण कार्यों का चयन ग्राम सभा द्वारा किया जाता है, जिससे गांव के समग्र विकास में ग्रामीणों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होती है। इसके साथ ही आजीविका डबरी, प्रधानमंत्री आवास योजना तथा योजनाओं की पारदर्शिता हेतु क्यूआर कोड के उपयोग की जानकारी भी दी गई।
इस अवसर पर कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद 1 अप्रैल 2026 से महात्मा गांधी नरेगा के स्थान पर विकसित भारत जी राम जी योजना लागू की जाएगी, जिससे ग्रामीणों को पहले से अधिक अधिकार और समयबद्ध भुगतान की गारंटी मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह की 7 तारीख को चावल महोत्सव के साथ रोजगार एवं आवास दिवस का आयोजन कर ग्रामीणों को योजनाओं के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री विनय कुमार पोयाम ने जानकारी दी कि वर्तमान में जिले में 55,599 ग्रामीणों को नरेगा के तहत रोजगार प्राप्त हो रहा है। रोजगार उपलब्ध कराने के मामले में कबीरधाम जिला प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। जिले की 437 ग्राम पंचायतों में 3,820 से अधिक कार्य प्रगति पर हैं, जिनसे ग्रामीणों को निरंतर आजीविका मिल रही है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को राशन कार्ड, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान कार्ड, स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय, पशु शेड, मुर्गी पालन शेड एवं आजीविका डबरी जैसी योजनाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।







