कवर्धा। जिले के भोरमदेव अभयारण्य के चिल्फी परिक्षेत्र 02 में लगी आग अभी भी धधक रही है। चिल्फी से आगे रेंगाखार रोड के किनारे सुलगी आग लगातार फैलती नजर आ रही है, जिससे वन संपदा और वन्यजीवों पर तत्काल खतरा मंडरा रहा है। मौके पर आग की लपटें और धुआं साफ दिखाई दे रहा है, लेकिन हालात पर नियंत्रण की ठोस व्यवस्था नजर नहीं आ रही।
सूखी पत्तियों और घास की मोटी परत के कारण आग तेजी से आगे बढ़ रही है। गर्म हवाओं के चलते इसके और भड़कने की आशंका है। यदि समय रहते काबू नहीं पाया गया तो यह आग अंदरूनी घने हिस्सों तक पहुंच सकती है, जिससे सैकड़ों हेक्टेयर जंगल प्रभावित हो सकते हैं।
यह अभयारण्य कई दुर्लभ वन्यजीवों, पक्षियों और औषधीय वनस्पतियों का सुरक्षित आश्रय स्थल है। आग से छोटे जीव-जंतु, घोंसले, जड़ी-बूटियां और प्राकृतिक आवास सबसे पहले प्रभावित होते हैं। इससे जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर असर पड़ता है।
भारतीय वन अधिनियम 1927 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अभयारण्य क्षेत्र में आगजनी या लापरवाही दंडनीय अपराध है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में फायर लाइन की निगरानी, नियमित गश्त और त्वरित अग्निशमन दल की सक्रियता अनिवार्य है। यदि आग अभी भी जारी है, तो यह प्रशासनिक सतर्कता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है।
तत्काल आवश्यकता है कि वन विभाग, अग्निशमन दल और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से मोर्चा संभालें, आग पर शीघ्र नियंत्रण करें और जिम्मेदारों की पहचान कर कठोर कार्रवाई करें। जंगल की हर जलती लपट केवल पेड़ों को नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी जला रही है।