कबीरधाम जिला में सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस की निगरानी और संचालन व्यवस्था को लेकर चिल्फी क्षेत्र में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बोड़ला विकासखंड के चिल्फी थाना मुख्यालय से करीब चार किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत लूप की उचित मूल्य दुकान से करीब चार क्विंटल चावल चोरी होने की घटना ने खाद्यान्न भंडारण और निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि दुकान तक खाद्यान्न पहुंचने से लेकर उपभोक्ताओं को वितरण, स्टॉक के रखरखाव, आवक-जावक के रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था तक पूरे सिस्टम की जांच की जरूरत सामने आ रही है।
पीडीएस में खाद्यान्न की प्रत्येक खेप का रिकॉर्ड, दुकानवार आवंटन, प्राप्त मात्रा, वितरण और शेष स्टॉक का हिसाब महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में लूप की दुकान से चार क्विंटल चावल गायब होने की स्थिति में यह पता लगाया जाना जरूरी है कि संबंधित अवधि में दुकान को कितनी मात्रा में चावल आवंटित हुआ, वास्तव में कितनी मात्रा प्राप्त हुई, कितनी मात्रा हितग्राहियों को वितरित की गई और घटना के समय रिकॉर्ड में कितना स्टॉक दर्ज था। पिछले माह की आवक-जावक पंजी, स्टॉक रजिस्टर, वितरण पंजी, ऑनलाइन रिकॉर्ड और भौतिक स्टॉक का मिलान इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकता है।
कैमरे की अनिवार्यता, फिर निगरानी व्यवस्था कहां
उचित मूल्य दुकानों की निगरानी के लिए निर्धारित व्यवस्थाओं में सीसीटीवी कैमरों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि क्षेत्र की सभी उचित मूल्य दुकानों में कैमरे लगे हैं या नहीं, वे चालू हालत में हैं या नहीं और नियमित रूप से उनकी निगरानी की जाती है या नहीं। यदि लूप की दुकान में कैमरा उपलब्ध था तो चोरी के समय की रिकॉर्डिंग और संबंधित फुटेज जांच का अहम आधार बन सकती है। यदि कैमरा नहीं था या बंद था तो जिम्मेदारी तय करने का सवाल भी सामने आता है।
शासकीय भवन में दुकान, मरम्मत की जिम्मेदारी पर सवाल
क्षेत्र में कुछ उचित मूल्य दुकानों का संचालन शासकीय भवनों में होने के बावजूद भवन की मरम्मत से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। यदि दुकान के लिए शासकीय भवन उपलब्ध कराया गया है तो उसकी मरम्मत, रखरखाव और सुरक्षित भंडारण व्यवस्था की जिम्मेदारी किस विभाग अथवा स्थानीय निकाय की है, इसे स्पष्ट किया जाना जरूरी है। पंचायत पर मरम्मत का दायित्व डालने से पहले संबंधित नियम और स्वीकृत व्यवस्था सार्वजनिक की जानी चाहिए।
कभी चना तो कभी शक्कर की शिकायतें
क्षेत्र में समय पर खाद्यान्न वितरण नहीं होने की शिकायतों के साथ चना और शक्कर की कथित अवैध बिक्री से जुड़े आरोप भी सामने आते रहे हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित दुकानों के पिछले महीनों के स्टॉक और वितरण रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन आवश्यक है। खास तौर पर चना, शक्कर और चावल की आवक-जावक तथा वितरण का दुकानवार मिलान किया जाए तो अनियमितता की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
गांव-गांव निजी वाहनों से खरीद की चर्चा
क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के साथ मध्यप्रदेश के सीमावर्ती गांवों तक निजी वाहनों से खाद्यान्न की खरीद करने वाले कथित कोचियों की गतिविधियों की चर्चा भी सामने आती रही है। यदि पीडीएस से प्राप्त खाद्यान्न की अवैध खरीद-बिक्री हो रही है तो यह केवल एक दुकान का मामला नहीं रह जाता, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। ऐसे मामलों में परिवहन, भंडारण, खरीद और बिक्री की कड़ियों की जांच जरूरी होगी।
आवश्यक वस्तु अधिनियम और पीडीएस से जुड़े प्रावधानों के तहत खाद्यान्न की अनधिकृत बिक्री, गबन या डायवर्जन पाए जाने पर संबंधित स्तर पर कार्रवाई का प्रावधान है। इसलिए लूप की घटना में सिर्फ चोरी का मामला दर्ज कर कार्रवाई समाप्त करने के बजाय दुकान का स्टॉक ऑडिट, पिछले महीनों की आवक-जावक, वितरण रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित अधिकारियों की निरीक्षण रिपोर्ट की जांच जरूरी है। साथ ही क्षेत्र की अन्य दुकानों का भी औचक भौतिक सत्यापन कराया जाए, ताकि व्यवस्था में कहीं व्यापक स्तर पर सेंध तो नहीं लगी है, इसका पता चल सके।
अब सवाल यह है कि चार क्विंटल चावल की कमी केवल स्थानीय चोरी है या पीडीएस निगरानी तंत्र की बड़ी कमजोरी का संकेत। इसका जवाब रिकॉर्ड के मिलान और निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा।