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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजन के तहत एमसीपी की राशि का बंदरबांट 

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कवर्धा , राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ( एनआरएलएम) योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं का जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए तरह तरह की योजनाएं संचालित किया जाता हैं। जिसमें ग्रामीण महिलाओं की समूह तैयार किया जाता हैं और उनको बचत के लिए प्रेरित किया जाता है। उनका बैंक में खाता खोलकर राशि को जमा किया जाता हैं । स्वा सहायता समूह की दीदियों को सूक्ष्म ऋण योजना के तहत कम ब्याज पर ऋण दिया जाता हैं और उसके ब्याज की राशि को प्रतिमाह समूह की दीदियों के द्वारा जमा किया जाता हैं। कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा विकासखंड के कलस्टर बीडोरा और बाजार चारभाटा में उक्त ऋण की व्याज राशि का बंदरबांट की जा रहा है साथ ही मिली जानकारी अनुसार अपने मनचाहे समूह को ही ऋण प्रदान किया जाता हैं। योजना का उद्देश्य विभिन्न स्तरों पर समर्पित सहायता संरचनाओं तथा संगठनों के माध्यम से सभी ग्रामीण परिवारों तक पहुंच सुनिश्चित करने और उनकी क्षमता में वृद्धि, वित्तीय स्थिति एवं स्व-प्रबंधित आत्मनिर्भर संगठनों, रोजगार, लाभकारी स्व-रोजगार एवं उद्यमों के माध्यम से गरीबी दूर करने का प्रयास करने का है लेकिन यहां के जिम्मेदार ऐसा नहीं कर रहे बल्कि समूह के दीदियों को आत्मनिर्भर बनाने के बजाए उन्हें कंगाल बना रहे है जो जांच का विषय है।

कलस्टर स्तर पर मनचाहे समूह को देते हैं ऋण

माइक्रोक्रेडिट एक ऐसी विधि है जिसके तहत समूह की दीदियों को लघु व्यवसाय शुरू करने या उसका विस्तार करने के लिए बहुत छोटी रकम उधार दी जाती है । जिसे धीरे धीरे वापस किया जाता हैं।
ऋण सुगमता से उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम)के तहत उन सभी पात्र महिला स्वा सहायता समूह को वार्षिक ब्याज दर पर सब्सिडी उपलब्ध कराने का प्रावधान है जिन्होंने प्रमुख वित्तीय संस्थानों से ऋण लिया है, जो कि सही समय पर ऋण की वापसी पर आधारित है (यह किसी स्वा सहायता समूह द्वारा पूंजीगत सब्सिडी प्राप्त करने की स्थिति में लागू नहीं होगा ) लेकिन यहां पर कलस्टर स्तर पर मौजूद अध्यक्ष, सचिव के मनचाहे समूह को ही ऋण देते है व्याज भी अधिक वसूलते है साथ ही उन्हें लोन देने के लिए बार बार घुमाते है जिससे महिला स्वा सहायता समूह की दीदियां परेशान होकर मायूस हो रहे है।
व्याज की राशि का बंदरबांट की संभावना
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) योजना अन्तर्गत महिला स्वा सहायता समूह की दीदियों के आय में वृद्धि करने के लिए सूक्ष्म ऋण योजना के तहत ऋण दिया जाता है जिसका ब्याज दीदियों के द्वारा नियमित रूप से प्रतिमाह जमा कर दिया जाता हैं लेकिन मिली जानकारी अनुसार उक्त ब्याज की राशि का बंदरबांट किया जाता हैं जिसका कोई हिसाब नहीं है। समूह की दीदियों के द्वारा जमा करने और राशि लेने वाले अपने खाता में अलग तिथि को जमा करते है मतलब उक्त राशि का निजी उपयोग भी किया जाता हैं । जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
दाल मिल से लाभ के बजाए हानि
महिला स्वा सहायता समूह की दीदियों के जीवन स्तर में सुधार करने के लिए सहसपुर लोहारा विकासखंड के दस महिला समूह को लाखों रुपए की दाल मिल उपलब्ध कराई गई है हालांकि दीदियों को मिल से दाल निकालने की प्रशिक्षण दिया गया है । मिल को चालू करने के लिए विद्युत विभाग से उन्हें कनेक्शन दिलाने में भी मदद किया गया है। दीदियों ने मिल से दाल तो नहीं निकाल पा रहे है बल्कि उनकी खुद की दाल निकल रहा है। प्रतिमाह बिजली का बिल पटाने में सक्षम नहीं है । बिजली विभाग ने राशि वसूली के लिए लोक अदालत में आवेदन भी दिए हैं ।
जांच में अनियमितता उजागर होने की संभावना
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) योजना अन्तर्गत ऋण वितरण में पूरा कबीरधाम के 16 कलस्टर किए जाने की संभावना है लेकिन सहसपुर लोहारा विकासखंड के कलस्टर बीडोरा और बाजार चारभाटा में कुछ ज्यादा ही गड़बड़ियां होने की जानकारी मिलता है। जिसका सूक्ष्म जांच की आवश्यकता है। यदि जांच सही तरीके से होगा तो कई जिम्मेदार लपेटे में आने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता।

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