गरियाबंद , गरियाबंद जिले से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है जिसमें त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान पीठासीन अधिकारी द्वारा शराब के नशे में मतदान करवाया जा रहा था शिकायत पर जांच उपरांत सही पाए जाने पर जिला निर्वाचन अधिकारी एवं गरियाबंद कलेक्टर दीपक अग्रवाल द्वारा बड़ी कार्यवाही करते हुए शराब के नशे में धूत पीठासीन अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है,शराब एक ऐसी लत है, जो किसी को लग जाए तो फिर छूटती नहीं है. ऐसा ही मामला गरियाबंद जिले के एक मतदान केंद्र में तैनात पीठासीन अधिकारी के साथ हुआ, जो शराब के नशे में ही मतदान कराने लगे. इस संबंध में हुई शिकायत की जांच में पुष्टि होने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी ने तत्काल प्रभाव से पीठासीन अधिकारी को निलंबित कर दिया.
मिली जानकारी के अनुसार गरियाबंद जिले के कांटीदादर स्कूल में प्रधान पाठक छगन लाल सोनेंद्र त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के द्वितीय चरण में मतदान के दौरान छुरा ब्लॉक की कुकदा बूथ में बतौर पीठासीन अधिकारी तैनात थे. मतदाताओं ने शिकायत किया कि अधिकारी शराब के नशे में धुत होकर मतदान को प्रभावित कर रहा है. इस पर पीठासीन अधिकारी की तत्काल मेडिकल जांच करवाई गई. जांच में शराब पीए जाने की पुष्टि होने के बाद आज जिला निर्वाचन अधिकारी दीपक अग्रवाल ने प्रधान पाठक को निलंबन का आदेश थमा दिया.
बता दें कि जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का अभी तृतीय चरण का मतदान 23 फरवरी को होना है. ऐसे में गरियाबंद कलेक्टर ने इस कार्रवाई के जरिए जिम्मेदारों को एक मैसेज भी दिया है. कलेक्टर अग्रवाल ने पहले ही कह दिया था कि लापरवाही करने वालों पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी.
मतदान केंद्र में पीठासीन अधिकारी की शराब पार्टी! चुनाव आयोग ने किया तत्काल निलंबन
पंचायत चुनाव के दौरान एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासन को सकते में डाल दिया। मतदान केंद्र क्रमांक 72 (शासकीय प्राथमिक शाला, कुकदा) पर तैनात पीठासीन अधिकारी छगन लाल शोनेन्द्र ने अपनी ड्यूटी को इतनी गंभीरता से लिया कि वह खुद ही मतदान केंद्र में “बेहोश” हो गए! कारण? शराब के नशे में धुत होकर मतदान केंद्र में ही सो गए, जिससे मतदान प्रक्रिया ठप हो गई।
मतदान छोड़कर नींद की गोद में अधिकारी
जानकारी के अनुसार, छगन लाल शोनेन्द्र, जो कि प्रधान पाठक (शा.पूर्व. मा.शाला, कांटीदादर, गरियाबंद) के पद पर कार्यरत हैं, उन्हें पंचायत चुनाव के लिए पीठासीन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन चुनाव प्रक्रिया शुरू होते ही उन्होंने मतदाताओं की चिंता छोड़कर खुद को मदहोशी के हवाले कर दिया। मतदान कर्मियों ने उन्हें जगाने की बहुत कोशिश की, लेकिन महाशय गहरी नींद में लीन थे।
शराब सेवन की हुई पुष्टि, तत्काल निलंबन
स्थिति को देखते हुए प्रशासन हरकत में आया और चिकित्सीय जांच कराई गई, जिसमें यह पुष्टि हो गई कि शोनेन्द्र ने ड्यूटी के दौरान शराब का सेवन किया था। चुनाव आयोग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए तुरंत प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की।
निलंबन आदेश के अनुसार, छगन लाल शोनेन्द्र को गरियाबंद विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में मुख्यालय तय किया गया है, और निलंबन अवधि में उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।